CSMCL में 183 करोड़ के ओवरटाइम घोटाले का खुलासा, अफसर बदलते रहे लेकिन जारी रहा कमीशन खेल

छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए ओवरटाइम भुगतान घोटाले की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी ACB-EOW की चार्जशीट के मुताबिक साल 2019-20 से 2023-24 के बीच कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के जरिए करीब 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा और कथित कमीशन नेटवर्क में इस्तेमाल हुआ।
जांच में यह भी सामने आया है कि CSMCL में प्रबंध संचालक बदलते रहे, लेकिन मैनपावर एजेंसियों को भुगतान और कमीशन का सिस्टम लगातार चलता रहा। मामले में 12 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट पेश की गई है, जिनमें से 8 आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं।
कैसे सामने आया ओवरटाइम घोटाला
मामले का खुलासा नवंबर 2023 में हुआ, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई के दौरान 28.80 लाख रुपए नकद बरामद किए। जांच में पता चला कि मैनपावर एजेंसियों के जरिए चेक रायपुर भेजे जाते थे और उन्हें कैश में बदलकर अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी होती थी।
इसके बाद जांच एजेंसियों ने मैनपावर एजेंसियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि वर्षों से कर्मचारियों के नाम पर फर्जी ओवरटाइम और बोनस क्लेम तैयार किए जा रहे थे। कई कर्मचारियों ने बयान दिया कि उन्हें सिर्फ मासिक वेतन मिलता था, अतिरिक्त भुगतान कभी नहीं मिला।
चार्जशीट के अनुसार ओवरटाइम भुगतान से जुड़ी बैंक ट्रांसफर डिटेल्स का स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया जाता था, फिर भी फाइलें लगातार पास होती रहीं।
टेंडर नियमों में बदलाव के बाद बढ़ा खेल
जांच में यह भी सामने आया कि साल 2019 में नई टेंडर प्रक्रिया लागू होने के बाद ओवरटाइम और अतिरिक्त दिवस भुगतान का दायरा बढ़ा। शराब दुकानें पूरे महीने संचालित होने का हवाला देकर कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त चार दिनों का भुगतान तय किया गया। इसी आधार पर एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर अतिरिक्त बिल लगाने शुरू कर दिए।
मैनपावर एजेंसियों को कर्मचारियों के वेतन पर 9 प्रतिशत सर्विस चार्ज भी दिया जाता था। आरोप है कि एजेंसियों ने ओवरटाइम और बोनस जैसी राशि पर भी सर्विस चार्ज वसूला, जबकि पूरा पैसा कर्मचारियों तक पहुंचा ही नहीं।
जांच में प्राइमवन वर्कफोर्स, ईगल हंटर, अलर्ट कमांडोज, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस और सुमीत फैसिलिटीज जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार कई एजेंसियों ने करोड़ों रुपए के अतिरिक्त भुगतान हासिल किए।
कमीशन नेटवर्क और अधिकारियों की भूमिका पर जांच जारी
चार्जशीट में दावा किया गया है कि ओवरटाइम भुगतान के एवज में कमीशन तय था। कर्मचारियों के मूल भुगतान पर 3 प्रतिशत और ओवरटाइम राशि पर 25 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। बाद में कथित तौर पर यह हिस्सा बढ़ाकर 33 प्रतिशत तक कर दिया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ अधिकारियों और एजेंसी संचालकों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि कर्मचारियों के नाम पर मिलने वाली राशि का हिस्सा कथित कमीशन नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
फिलहाल एजेंसियां, पूर्व अधिकारी और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक मामले में आगे और खुलासे हो सकते हैं।





