बस्तर में माओवादियों की संख्या घटी, आत्मसमर्पण का आखिरी मौका, 5 अब भी अंडरग्राउंड

बस्तर क्षेत्र में माओवादियों का नेटवर्क अब सिमटकर अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। लगातार आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते सक्रिय माओवादियों की संख्या तेजी से कम हुई है, लेकिन अब भी कुछ कट्टर कैडर हथियार डालने को तैयार नहीं हैं।

हाल ही में माओवादी कमांडर और अन्य प्रमुख सदस्यों के आत्मसमर्पण के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। इसके बावजूद कुछ माओवादी अब भी अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं और सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए हैं।

बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि अब गिने-चुने माओवादी ही बचे हैं और उनके पास मुख्यधारा में लौटने का यह अंतिम अवसर है। अगर वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई और तेज की जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में ही अब कुछ माओवादी सक्रिय हैं। इन क्षेत्रों में लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

दूसरी ओर तेलंगाना पुलिस ने भी वहां के मूल माओवादियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की है। आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां बड़ी संख्या में लोग संगठन से जुड़े थे, अब यह संख्या घटकर बेहद कम रह गई है।

बचे हुए माओवादियों में कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं, जो अब भी अंडरग्राउंड हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि माओवाद का ढांचा लगभग खत्म हो चुका है और अब अंतिम चरण में निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।

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