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GST 2.0 से देश को फायदा, लेकिन छत्तीसगढ़ को 1500 करोड़ राजस्व नुकसान का अनुमान

रायपुर। देश में GST 2.0 लागू होने के बाद जहां एक ओर करदाताओं और आम लोगों को राहत मिली है और जीएसटी कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ जैसे उत्पादन-प्रधान राज्यों के सामने नई वित्तीय चुनौती खड़ी हो गई है। कम उपभोग, अधिक उत्पादन और पुराने टैक्स क्रेडिट के बोझ के कारण राज्य को इस वित्तीय वर्ष में करीब 1500 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है।

देश में बढ़ा GST कलेक्शन

1 जुलाई 2017 को लागू हुई जीएसटी व्यवस्था को देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाता है। GST 2.0 में दरों में कमी और प्रक्रियाओं को आसान करने से व्यापार और आम लोगों को राहत मिली है।

दिसंबर 2025 में देश का कुल जीएसटी कलेक्शन 1.75 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 6.1 प्रतिशत अधिक है। वहीं जनवरी 2026 में यह बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में क्यों बढ़ी चिंता

देश में राजस्व बढ़ने के बावजूद छत्तीसगढ़ में जीएसटी कलेक्शन पर दबाव बढ़ गया है और इस वर्ष करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

जीएसटी गंतव्य आधारित कर प्रणाली है, यानी कर का लाभ उसी राज्य को मिलता है जहां वस्तु का उपभोग होता है। छत्तीसगढ़ में स्टील, आयरन और कोयले का उत्पादन अधिक है, लेकिन उपभोग कम होने के कारण कर का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों को चला जाता है।

कोयला सेक्टर बना मुख्य वजह

राज्य के राजस्व पर सबसे ज्यादा असर कोयला क्षेत्र से पड़ रहा है। पहले कोयले पर 5 प्रतिशत जीएसटी था और इनपुट पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिससे कंपनियों के पास भारी इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो गया। अब कोयले पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होने के बावजूद कंपनियां पुराने आईटीसी का उपयोग कर रही हैं, जिससे राज्य को नकद राजस्व कम मिल रहा है।

अन्य राज्यों में भी असर

ओडिशा और झारखंड जैसे उत्पादन-प्रधान राज्यों में भी इसी तरह की स्थिति बन रही है, जहां करीब 1000 करोड़ रुपये तक राजस्व नुकसान की आशंका है। छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा करीब 1500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है।

विकास योजनाओं पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्व में कमी का असर राज्य की विकास और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है। स्थिति में सुधार 2027-28 के बाद संभव माना जा रहा है।

इस समस्या के समाधान के लिए आईजीएसटी सेटलमेंट सिस्टम की समीक्षा, उत्पादन राज्यों के लिए संतुलन व्यवस्था और क्षतिपूर्ति तंत्र पर विचार करने की जरूरत बताई जा रही है।

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