सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना जा सकता, हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार रखी

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के आदेश को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता।

अपील की अनुमति की मांग खारिज

मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट से आरोपी के बरी होने के खिलाफ अपील की अनुमति देने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

कोर्ट ने सबूतों को माना अहम

कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने पीड़िता को धमकाकर या डर दिखाकर संबंध बनाए थे।

कोर्ट ने यह भी पाया कि पीड़िता पहले से शादीशुदा और गर्भवती थी तथा उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक थी। साथ ही यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर सहमति हासिल की या पीड़िता की सहमति के बिना संबंध बनाए गए।

सहमति को माना प्रमुख आधार

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब बालिग महिला अपनी सहमति से शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़िता की याचिका खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के दोषमुक्ति आदेश को बरकरार रखा।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई