मूक-बधिर पीड़िता की गवाही पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दुष्कर्मी को मरते दम तक उम्रकैद

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा है कि केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों और इशारों से दी गई जानकारी भी कानूनी रूप से मौखिक साक्ष्य मानी जाएगी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी और दुष्कर्मी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई।
यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। आरोपी फिलहाल जेल में बंद है और उसे पूरी सजा काटनी होगी।
इशारों और गुड़िया के सहारे दर्ज हुई गवाही
मामला बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र का है, जहां 29 जुलाई 2020 को 19 वर्षीय मूक-बधिर युवती घर में अकेली थी। इसी दौरान रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म कर फरार हो गया।
शाम को मां के लौटने पर पीड़िता ने इशारों में पूरी घटना बताई, जिसके बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
सुनवाई के दौरान पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए कोर्ट ने साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली। कुछ सवालों के जवाब के लिए प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाई गई, जिसके माध्यम से पीड़िता ने इशारों में घटना को समझाया। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद है और मेडिकल व फॉरेंसिक रिपोर्ट से भी घटना की पुष्टि होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संकेतों के माध्यम से दी गई गवाही भी वैध साक्ष्य है।
कोर्ट ने आरोपी को IPC धारा 376(2) के तहत मौत होने तक उम्रकैद, धारा 450 के तहत 5 साल की सजा और 21 हजार रुपए जुर्माना लगाया है।





