Humanity Shamed: सिम्स बिलासपुर में मानवता शर्मसार डेढ़ घंटे तक तड़पती रही प्रसूता,
परिजनों का आरोप- 'इलाज के बजाय निजी अस्पताल जाने की दी जा रही सलाह'....

बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स (CIMS) से एक बेहद विचलित करने वाली घटना सामने आई है, (Humanity Shamed) जहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर नज़र आ रही है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह एक गंभीर प्रसूता के परिजन अस्पताल परिसर में चीख-पुकार कर रहे हैं। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि अस्पताल पहुँचने के डेढ़ घंटे बाद भी किसी डॉक्टर या स्टाफ ने मरीज को देखना तक मुनासिब नहीं समझा, जबकि प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
क्या केवल निजी अस्पतालों को फायदा पहुँचाने का अड्डा बन गया है मेडिकल कॉलेज? (Humanity Shamed)
हद तो तब हो गई जब उचित उपचार देने के बजाय, कथित तौर पर उन्हें मरीज को किसी निजी अस्पताल ले जाने की नसीहत दे दी गई। यह स्थिति न केवल प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है, बल्कि ‘जननी सुरक्षा’ और ‘मुफ्त इलाज’ जैसे सरकारी नारों पर भी एक बड़ा तमाचा है।
सवाल यह उठता है कि यदि संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में ही गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़े और उन्हें निजी हाथों में धकेला जाए, तो फिर आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? यह घटना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की नैतिकता पर गहरे सवाल खड़े करती है कि आखिर एक तड़पती महिला को बिना इलाज के छोड़ देना किस प्रकार की संवेदनशीलता है….





