बिहार की राजनीति के केंद्र में नीतीश कुमार: दो दशकों से सत्ता की धुरी, राज्यसभा चुनाव में फिर बढ़ी चर्चा

नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के सबसे अहम चेहरों में शामिल रहे हैं। ‘सुशासन बाबू’ की छवि के साथ उन्होंने 2005 से लगातार राज्य की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और कई बार गठबंधन बदलते हुए भी मुख्यमंत्री पद पर बने रहे हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक बार फिर उनकी राजनीतिक भूमिका पर देश की निगाहें टिक गई हैं।

दो दशक से सत्ता के केंद्र में

नीतीश कुमार 2005 में पहली बार भाजपा के साथ मिलकर बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। तब से लेकर अब तक वे राज्य की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड भी कायम किया।

जेपी आंदोलन से शुरू हुआ सफर

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर 1970 के दशक में जेपी आंदोलन से शुरू हुआ था। आपातकाल के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गए। बाद में उन्होंने संसदीय राजनीति में कदम रखा और 1990 के दशक में केंद्र सरकार में कृषि और रेल मंत्रालय जैसे अहम विभागों के मंत्री भी रहे।

समता पार्टी से जदयू तक

1994 में उन्होंने जॉर्ज फ़र्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना की, जो आगे चलकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) में परिवर्तित हो गई। इसी पार्टी के जरिए उन्होंने बिहार में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।

गठबंधनों की राजनीति के माहिर खिलाड़ी

नीतीश कुमार की राजनीति की खासियत गठबंधन बदलने की रणनीति रही है।

  • 2013 में उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला किया।
  • 2015 में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी के साथ महागठबंधन बनाकर सरकार बनाई।
  • 2017 में फिर भाजपा के साथ लौट आए।
  • 2022 में दोबारा महागठबंधन के साथ गए और
  • 2024 में फिर एनडीए में वापसी कर सरकार बनाई।

इसी कारण विपक्ष अक्सर उन्हें “पलटू राम” कहकर भी निशाना बनाता रहा है।

2014 में दिया था इस्तीफा

2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू की हार के बाद नीतीश कुमार ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि करीब 9 महीने बाद राजनीतिक परिस्थितियों के चलते वे फिर से सत्ता में लौट आए।

7 दिन के मुख्यमंत्री भी रहे

बहुत कम लोग जानते हैं कि वर्ष 2000 में नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण उन्हें सिर्फ 7 दिन में ही इस्तीफा देना पड़ा था।

राज्यसभा चुनाव से फिर चर्चा

राज्यसभा चुनाव के मद्देनज़र एक बार फिर बिहार की राजनीति चर्चा में है। एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें नीतीश कुमार का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी रणनीतिक भूमिका आगे भी अहम बनी रह सकती है।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई