गुजरात विधानसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष का संकल्प: भूपेंद्र पटेल ने गूंजाए राष्ट्रभक्ति के स्वर

गांधीनगर। भूपेंद्र पटेल ने गुजरात विधानसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गौरव संकल्प पेश किया। सदन में वंदे मातरम् के नारों के बीच उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आन, बान और शान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ आजादी के महायज्ञ की आहुति और राष्ट्रभक्ति की मशाल है, जो विकास की निरंतर धड़कती पहचान बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से देशभर में इस ऐतिहासिक रचना के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस गीत की हर पंक्ति भारत माता के प्रति गहन भक्ति का भाव प्रकट करती है।

बंकिम चंद्र की अमर रचना

पटेल ने बताया कि वर्ष 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक मंत्र बना। ब्रिटिश शासन के दौरान इस पर प्रतिबंध भी लगाया गया, लेकिन इसके बावजूद यह स्वतंत्रता संग्राम का जयघोष बना रहा।

‘वंदे मातरम्’ की शाश्वत प्रासंगिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलामी के दौर में रचा गया यह गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसकी भावनाएं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता और राष्ट्र प्रथम की चेतना को मजबूत करती हैं।

उन्होंने उल्लेख किया कि संविधान सभा ने 1950 में ‘वंदे मातरम्’ को जन गण मन के समकक्ष राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।

सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत को नया सम्मान मिला है। “हर घर तिरंगा” और “मेरी मिट्टी-मेरा देश” जैसे अभियानों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल इतिहास नहीं, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की प्रेरणा है।

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