Birth Centenary Celebrations: पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी जन्म शताब्दी समारोह: छत्तीसगढ़ी अस्मिता के पुरोधा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

अरुण साव ने किया स्मृति ग्रंथ का विमोचन,

छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाले (Birth Centenary Celebrations) महान साहित्यकार पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी के अवसर पर लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्व. चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ी स्वाभिमान का प्रतीक बताया। साव ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि 2 अप्रैल 2018 को चतुर्वेदी को मिला पद्मश्री सम्मान व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी छत्तीसगढ़ी सभ्यता और माटी का सम्मान था।

चतुर्वेदी के सपनों को साकार करने के लिए सरकार है प्रतिबद्ध, (Birth Centenary Celebrations)

उन्होंने चतुर्वेदी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें एक ऐसा साहित्यकार और पत्रकार बताया जिन्होंने एक साधारण गांव से निकलकर अपनी साधना और मातृ प्रेरणा से शिखर को छुआ। उप मुख्यमंत्री ने इस दौरान उन पर केंद्रित विशेष ‘स्मृति ग्रंथ’ का विमोचन भी किया और विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार उनके द्वारा देखे गए समृद्ध छत्तीसगढ़ी भाषा के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। कार्यक्रम में मौजूद विद्वानों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका अविस्मरणीय रही है।

पूर्व अध्यक्ष विनय पाठक ने उनकी लेखनी को ‘गुरतुर गोठ’ के माध्यम से लोकजीवन की आत्मा बताया, वहीं वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने उन्हें छत्तीसगढ़ की प्रतिमूर्ति और एक अमर पुरुष की संज्ञा दी। इस जन्म शताब्दी समारोह में विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, महापौर पूजा विधानी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने चतुर्वेदी के कृतित्व को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया……

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