लोकसभा में ‘देश बेचने’ पर सियासी संग्राम: सीतारमण ने राहुल गांधी को शर्म-अल-शेख की याद दिलाई

नई दिल्ली। लोकसभा में अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “आपने देश को बेच दिया, भारत माता को बेच दिया। क्या आपको शर्म नहीं आती?”
राहुल गांधी के इस बयान का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस और यूपीए सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने 2009 के शर्म-अल-शेख जॉइंट स्टेटमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि “देश को बेचने का काम तो यूपीए सरकार ने किया था। जो लोग शर्म-अल-शेख में पाकिस्तान के साथ बातचीत कर रहे थे, वे आज हमें सुझाव दे रहे हैं।”
सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों, गरीबों और देश के हितों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि “आज तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ जो भारत को बेच सके, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा कभी नहीं करेंगे।”
इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कह चुके हैं कि “कोई माई का लाल भारत को बेच नहीं सकता और न खरीद सकता।”
क्या था 2009 का शर्म-अल-शेख समझौता?
2009 में मिस्र के शर्म-अल-शेख में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) सम्मेलन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सैयद यूसुफ रजा गिलानी के बीच मुलाकात हुई थी। यह बैठक 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के सात महीने बाद हुई थी।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद को साझा खतरा बताया और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। डॉ. मनमोहन सिंह ने मुंबई हमलों के दोषियों को सजा दिलाने की जरूरत दोहराई, जबकि गिलानी ने जांच में सहयोग का आश्वासन दिया।
संयुक्त बयान में बलूचिस्तान का जिक्र भी शामिल था, जिसे लेकर बाद में विवाद खड़ा हुआ। पाकिस्तान ने इसका हवाला देकर भारत पर आरोप लगाए।
जयशंकर भी उठा चुके हैं मुद्दा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल में शर्म-अल-शेख समझौते का जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने संयुक्त बयान का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए किया कि भारत ने बलूचिस्तान में अपनी भूमिका स्वीकार की है, जबकि भारत हमेशा से पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।
लोकसभा में इस मुद्दे पर बहस के साथ सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर देशहित से समझौता करने के आरोप लगा रहे हैं।





