117 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश पर सियासी घमासान: जांच में सभी जीवित मिले, कांग्रेस ने साजिश का आरोप लगाया

मतदाता सूची से 117 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संबंधित मतदाताओं को मृत या क्षेत्र से गायब बताते हुए नाम काटने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन जांच में सभी मतदाता अपने पते पर मौजूद पाए गए।
मामला बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के चांटीडीह इलाके का है, जहां बूथ क्रमांक 191, 192 और 193 में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए। इनमें बूथ 191 के 10, बूथ 192 के 15 और बूथ 193 के 92 मतदाताओं के नाम हटाने का आवेदन शामिल था। क्षेत्र को मुस्लिम बहुल बताया जा रहा है।
फॉर्म जमा होने के बाद बीएलओ ने मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया। जांच में सभी मतदाता अपने निवास पर मिले और किसी के भी मृत या स्थानांतरित होने की पुष्टि नहीं हुई। बीएलओ ने मतदाताओं के दस्तावेज दोबारा लिए, फोटो ली और अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी।
मामले की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेताओं ने इसे मुद्दा बनाते हुए विरोध जताया। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी प्रभावित मतदाताओं के साथ कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से मिले और पूरे प्रकरण की जांच की मांग की। उनका आरोप है कि सुनियोजित तरीके से एक विशेष समुदाय और कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की गई।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के तहत पहले ही दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका था और प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी थी, फिर इतने बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 जमा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। पार्टी का कहना है कि प्रक्रिया का दुरुपयोग कर मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
बताया गया है कि फॉर्म-7 ‘प्राण’ नाम के व्यक्ति द्वारा जमा किए गए हैं। कांग्रेस ने आशंका जताई है कि यह नाम फर्जी हो सकता है और इसकी जांच की जानी चाहिए। वहीं निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच कराई गई और सत्यापन में सभी मतदाता सही पाए गए, इसलिए आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई है।





