बस्तर ओलंपिक 2025-26: खेल के मैदान से शांति और विश्वास की नई कहानी लिखता बस्तर

रायपुर। कभी नक्सलवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान रहा छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल आज खेल, विश्वास और उम्मीद के नए अध्याय लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ इस बदलाव का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया है। यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण, सांस्कृतिक गौरव और शांति स्थापना का व्यापक अभियान बन गया है।

ऐतिहासिक सहभागिता: जब पूरा बस्तर मैदान में उतरा
बस्तर ओलंपिक 2025 में अभूतपूर्व भागीदारी दर्ज की गई। संभाग के सातों जिलों— बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर— से कुल 3,91,289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया। इनमें 1,63,668 पुरुष और 2,27,621 महिला खिलाड़ी शामिल रहीं।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी को सामाजिक परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। जिस क्षेत्र में कभी भय और अविश्वास का माहौल था, वहां बेटियों की सक्रिय उपस्थिति भरोसे और आत्मविश्वास का नया संदेश दे रही है।

“नक्सलवाद का समाधान अवसर से” – मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि नक्सलवाद का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं को अवसर और सकारात्मक मंच देने से संभव है। गृह (पुलिस) विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से यह आयोजन छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बन गया।

परंपरा और आधुनिकता का संगम
बस्तर ओलंपिक में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, कराते और वेटलिफ्टिंग जैसे खेल शामिल किए गए।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें 300 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों और 18 से अधिक माओवादी हिंसा से प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। जूनियर (14–17 वर्ष) और सीनियर वर्ग के लिए अलग श्रेणियां बनाई गईं। इससे यह संदेश गया कि बस्तर अब बहिष्कार नहीं, पुनर्वास और पुनर्जन्म की भूमि बन रहा है।
तीन चरणों में पारदर्शी आयोजन
प्रतियोगिताएं तीन स्तरों पर आयोजित की गईं-
•विकासखंड स्तर: 25 अक्टूबर से
•जिला स्तर: 5 नवंबर से
•संभाग स्तर: 24 नवंबर से
विजेताओं को नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की गईं। पुरस्कार राशि DBT के माध्यम से सीधे खातों में भेजी गई। संभागीय विजेताओं को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया गया, जो युवाओं के लिए नई पहचान बनकर उभरा।

‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ बना राष्ट्रीय मॉडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए इसे विकास और खेल का संगम बताया। आज यह आयोजन ‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ के सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
इसका शुभंकर वन भैंसा और पहाड़ी मैना रहे— वन भैंसा सामूहिक शक्ति और साहस का प्रतीक, जबकि पहाड़ी मैना संवाद और संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक बनी।
अमित शाह का रोडमैप
समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण अंत का लक्ष्य है। उन्होंने बस्तर को पर्यटन और उद्योग का केंद्र बनाने की बात कही और विश्वास जताया कि यहां का कोई युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में पदक जीत सकता है।
बदलता हुआ बस्तर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की संस्कृति और प्रतिभा का उत्सव है। उन्होंने माना कि इतनी बड़ी भागीदारी का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सातों जिलों की टीम ने ऐतिहासिक कार्य किया।
आज बस्तर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। बस्तर ओलंपिक इसी बदलाव का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया है।
यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस नए बस्तर का जयघोष है जो अब हिंसा नहीं, विकास से पहचाना जा रहा है— जो अतीत की छाया से निकलकर भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है।





