सुप्रीम कोर्ट में चैतन्य बघेल की जमानत पर सुनवाई एक हफ्ते बाद

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में चैतन्य बघेल को मिली जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की अपील पर एक सप्ताह बाद सुनवाई करेगा। चैतन्य बघेल, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और एन. वी. अंजारिया की पीठ के सामने राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि जमानत मिलने के बाद मामले का एक अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है।
इसी मामले से जुड़े धन शोधन (PMLA) केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी चैतन्य बघेल की जमानत को अलग से चुनौती दी है। कोर्ट ने कहा कि दोनों मामलों पर सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट जाने की सलाह
पीठ ने भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया की याचिका पर भी सुनवाई की। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्हें पहले भी अलग-अलग मामलों में जमानत मिल चुकी है, फिर भी नई एफआईआर दर्ज कर दिसंबर में दोबारा गिरफ्तार किया गया—यह छठी गिरफ्तारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने चौरसिया को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जमानत के लिए संपर्क करने को कहा और निर्देश दिया कि याचिका एक सप्ताह में दाखिल की जाए, जिस पर हाईकोर्ट प्राथमिकता से दो सप्ताह में फैसला करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईओडब्ल्यू के एक अलग मामले में भी वे हाईकोर्ट जा सकती हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
- हाईकोर्ट ने 2 जनवरी को कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी।
- राज्य सरकार का आरोप है कि वे इस मामले के मुख्य आरोपियों और साजिशकर्ताओं में से हैं।
- ED के मुताबिक, 2019–2022 के बीच हुए कथित घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और गिरोह ने अवैध लाभ कमाया। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल ने करीब ₹1,000 करोड़ के लेन-देन में भूमिका निभाई।





