अमित शाह के दौरे से पहले जगदलपुर हाई अलर्ट पर, बस्तर में सुरक्षा से लेकर विकास तक कई मुद्दे चर्चा में

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक दिवसीय बस्तर दौरे को लेकर जगदलपुर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। शहर को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। एक हजार से अधिक पुलिस जवान, सीआरपीएफ और जिला बल की तैनाती की गई है। लालबाग मैदान को सुरक्षा घेरे में लेकर अभेद्य किले में तब्दील किया गया है। दिल्ली से पहुंची विशेष सुरक्षा टीम ने मोर्चा संभाल लिया है। मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक एडवाइजरी लागू की गई है और सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक वीआईपी रूट बंद रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है।

बस्तर क्षेत्र को नक्सलवाद के अंतिम दौर में बताया जा रहा है। लगातार केंद्रीय नेतृत्व के दौरों से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है। जंगलों और दुर्गम इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज किए गए हैं। नए सुरक्षा कैंप खुलने से अंदरूनी गांवों तक विकास पहुंच रहा है। आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों से नक्सली नेटवर्क कमजोर पड़ा है। स्थानीय लोग अब शांति, शिक्षा और खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जगदलपुर में पुराने पुल से भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। निर्माणाधीन नए पुल के चलते ट्रकों को जर्जर पुल से निकाला जा रहा है। रात में बैरिकेड हटाकर वाहनों को पार कराया जाता है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। धूल और ट्रैफिक दबाव से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। जनप्रतिनिधियों ने सख्त कदम उठाने की मांग की है।

शहर में एक प्रस्तावित वेब सीरीज के शीर्षक को लेकर भी विवाद गहराया हुआ है। ब्राह्मण समाज और सनातन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है। धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर की मांग की गई है। पुलिस ने मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

नारायणपुर क्षेत्र में मृतक स्तंभ परंपरा आज भी जीवित है। इस परंपरा के तहत काष्ठ कला में व्यक्ति का जीवन उकेरकर स्मृति के रूप में सुरक्षित किया जाता है। यह परंपरा समाज के मार्गदर्शकों और विशिष्ट व्यक्तियों के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। शिल्पकार इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

नारायणपुर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रही सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। एक माह के भीतर ही डामरीकरण उखड़ने लगा है। ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। अस्थायी मरम्मत से लोग असंतुष्ट हैं और आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

दंतेवाड़ा के आमदई माइंस में मजदूरों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी है। खनन और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप है। सैकड़ों ट्रक खड़े हैं और आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। मजदूर श्रेणी परिवर्तन की मांग पर अड़े हैं, जबकि प्रबंधन ने मांग मानने से इंकार किया है। रोजी-रोटी पर संकट गहराता जा रहा है।

चित्रकोट जलप्रपात में लगाई गई तिरंगा लाइटिंग व्यवस्था बंद पड़ी है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना अधूरी रह गई है। ग्रामीणों ने खर्च की जांच की मांग की है।

बस्तर के जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए तैनात फायर वॉचरों की संख्या अपर्याप्त बताई जा रही है। लाखों एकड़ वन क्षेत्र के लिए मात्र 148 फायर वॉचर तैनात हैं। आगजनी से दुर्लभ वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं। विभागीय कार्रवाई को कमजोर माना जा रहा है।

इंद्रावती नदी और चित्रकोट जलप्रपात के सूखने से बस्तर की पहचान पर संकट खड़ा हो गया है। एनीकटों के सहारे ही जल आपूर्ति हो रही है। किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है। पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इंद्रावती बचेगी तभी बस्तर बचेगा।

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