सुकमा में 29 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, दरभा डिवीजन का सपोर्ट सिस्टम टूटा

सुकमा । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से बड़ी खबर सामने आई है। बुधवार को दक्षिण बस्तर के सुकमा में 29 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस आत्मसमर्पण को दरभा डिवीजन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे माओवादियों का पूरा सपोर्ट सिस्टम लगभग खत्म हो गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बस्तर में सक्रिय शीर्ष माओवादी नेताओं के लिए काम करते थे। ये लोग उनकी बैठकों की व्यवस्था करने, खाने-पीने का इंतजाम करने और सड़कों व पुलों के नीचे आईईडी लगाने जैसे खतरनाक कामों में शामिल थे। बताया गया है कि इनका संबंध वर्ष 2013 के झीरम घाटी हमले से भी रहा है, जिसमें 28 कांग्रेस नेताओं समेत कुल 32 लोगों की मौत हो गई थी।
आत्मसमर्पण करने वालों में प्रमुख नाम पोडियम बुधरा का है, जो दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन (DAKMS) का मुखिया था और जिस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा अन्य नक्सली DAKMS, मिलिशिया और माओवादियों के जनताना सरकार विंग से जुड़े हुए थे।
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि इन 29 नक्सलियों के आत्मसमर्पण से दरभा डिवीजन में माओवादियों का सपोर्ट सिस्टम पूरी तरह कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में गोगुंडा इलाके में स्थापित सुरक्षा कैंप ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
एसपी ने बताया कि गोगुंडा इलाका पहले दुर्गम और दूरस्थ होने के कारण माओवादियों का मजबूत और सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। लेकिन सुरक्षा कैंप स्थापित होने के बाद यह इलाका अब माओवादियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है।
गौरतलब है कि दरभा डिवीजन को कभी माओवादियों की सबसे खतरनाक यूनिटों में गिना जाता था। इसी डिवीजन ने मई 2013 में बस्तर के झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला किया था। अब लगातार हो रही कार्रवाइयों और आत्मसमर्पण से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिलती नजर आ रही है।





