छत्तीसगढ़ में 24 स्वास्थ्य मितान हुए बेरोजगार, 10 साल की सेवा एक झटके में खत्म

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत काम कर रहे 24 स्वास्थ्य मितानों की नौकरी अचानक खत्म कर दी गई है। ये सभी मितान पिछले 10 से 12 सालों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में काम कर रहे थे। वे आयुष्मान कार्ड बनाने से लेकर क्लेम प्रोसेसिंग और कैंप लगाने जैसे कई अहम काम संभालते थे।

इनकी सेवा एक निजी कंपनी FHPL के माध्यम से थी, जिसका टेंडर 30 अप्रैल 2025 को खत्म हो गया। इसके बाद न तो कंपनी को आगे बढ़ाया गया और न ही इन कर्मचारियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

स्वास्थ्य मितानों का कहना है कि उन्होंने सालों तक बिना रुके काम किया, यहां तक कि जब 4-5 महीनों तक वेतन भी समय पर नहीं मिला, तब भी उन्होंने अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे।

नीति आयोग और आयुष्मान भारत की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ आयुष्मान कार्ड बनाने में देश में पहले नंबर पर रहा और क्लेम प्रोसेसिंग में भी राष्ट्रीय औसत से दोगुना बेहतर काम किया। इसका बड़ा श्रेय इन स्वास्थ्य मितानों को जाता है।

अब जब उनकी सेवाएं बिना कोई सूचना और विकल्प के अचानक खत्म कर दी गई हैं, तो उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि उन्हें ‘कलेक्टर दर पर डाटा एंट्री ऑपरेटर’ के रूप में समायोजित किया जाए। इससे उनका अनुभव भी काम आएगा और भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।

स्वास्थ्य मितान बोले: “हमने सालों तक मेहनत की है, अब सरकार हमें ऐसे सड़कों पर न छोड़े। हमें स्थाई समाधान चाहिए।”

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