डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 23 लाख की ठगी, खुद को CBI अधिकारी बताकर रिटायर्ड शिक्षक को बनाया शिकार

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर कई किस्तों में रकम ट्रांसफर करवाई।
मामला पुसौर थाना क्षेत्र का है। पीड़ित रिटायर्ड शिक्षक को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर बताया गया कि उनके नाम से मुंबई में बैंक खाता खोला गया है और वे जांच के दायरे में हैं। ठगों ने उन्हें गोपनीयता बनाए रखने और सहयोग करने के नाम पर भरोसे में लिया और कार्रवाई से बचाने का झांसा दिया।
डर और दबाव में आकर पीड़ित ने यूपीआई, पेटीएम और आरटीजीएस के जरिए 6 दिनों में कुल 23 लाख से अधिक राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी। बाद में ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए धमकियां भी दीं, जिसके बाद पीड़ित ने अपने परिजनों को जानकारी दी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और आरोपियों के बैंक खातों में जमा 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होल्ड कराई। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के बैंगलूरू में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम वहां पहुंची और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विग्नेश प्रकाश और स्टीफन थॉमस के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह कर्नाटक के साथ-साथ दुबई से भी संचालित हो रहा था। गिरोह का मास्टरमाइंड विदेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को चला रहा था।
पुलिस के अनुसार आरोपी डिजिटल अरेस्ट, आधार और सिम लिंकिंग, क्रिप्टो निवेश और फर्जी लोन ऐप्स के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
मामले की जांच जारी है और पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।





