होर्मुज स्ट्रेट पार कर रहा 40 हजार मीट्रिक टन एलपीजी से लदा भारतीय जहाज, आसपास तैनात नौसेना के युद्धपोत

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच 40 हजार मीट्रिक टन एलपीजी से लदा भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ होर्मुज स्ट्रेट को पार कर रहा है। जहाज के आसपास भारतीय नौसेना के युद्धपोत स्टैंडबाय पर तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बताया जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद यह जहाज अगले कुछ दिनों में भारत पहुंच जाएगा। इसके साथ ही एलपीजी से लदे अन्य जहाजों के भी भारत के लिए रवाना होने की संभावना जताई जा रही है। ईरान की ओर से भारतीय जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दिए जाने के बाद स्थिति में कुछ राहत मिली है।
माना जा रहा है कि भारत और ईरान के बीच उच्च स्तर पर हुई बातचीत के बाद यह अनुमति मिली है। इसके बाद भारतीय जहाजों की आवाजाही को लेकर रास्ता साफ हुआ है। सरकार का कहना है कि जल्द ही अन्य जहाज भी भारत पहुंचेंगे, जिससे एलपीजी की आपूर्ति सामान्य होने में मदद मिलेगी।
उधर संयुक्त अरब अमीरात के मीना साकर बंदरगाह क्षेत्र के पास एक भारतीय जहाज एलपीजी टैंकर के साथ लंगर डाले खड़ा है। जहाज के कप्तान के अनुसार अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद से जहाज और उसके क्रू सदस्य वहीं फंसे हुए हैं। यह जहाज कुवैत के मीन अल अहमदी बंदरगाह से गुजरात के दीनदयाल कांडला बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था।
इस जहाज में मौजूद एलपीजी टैंकर से लगभग 36 लाख गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं। जहाज के कप्तान ने सुरक्षित वापसी के लिए सरकार और भारतीय नौसेना से मदद की अपील की है।
पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी की खबरें सामने आई हैं और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें भी देखी गईं। हालांकि सरकार ने गैस की कमी से इनकार करते हुए कहा है कि आपूर्ति सामान्य है और अफवाहों के कारण लोग घबराकर ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार घरेलू एलपीजी की डिलीवरी का औसत चक्र करीब ढाई दिन का है। गैस के दुरुपयोग और डायवर्जन को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड प्रणाली भी लागू की गई है, जिसके तहत ग्राहकों को सिलेंडर प्राप्त करते समय डिलीवरी कर्मी को एक कोड देना होगा।
मांग को नियंत्रित रखने के लिए एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि कच्चे तेल और गैस की कुल उपलब्धता को लेकर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।





