भारत के लिए क्यों रणनीतिक है ओमान, पीएम मोदी के दौरे से फिर चर्चा में द्विपक्षीय रिश्ते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद ओमान के दौरे पर हैं। इससे पहले वह फरवरी 2018 में इस खाड़ी देश की यात्रा पर गए थे। ओमान भारत के लिए केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और रक्षा सहयोग में भी अहम भूमिका निभाता है। यह पहला खाड़ी देश है, जिसके साथ भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं।
भारत और ओमान के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में भारत का ओमान को निर्यात करीब 3.96 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारत, ओमान के लिए आयात का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। भारतीय कंपनियों ने ओमान में लोहा-इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है। इसके अलावा ओमान में करीब 6.2 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी और पेशेवर शामिल हैं।
दोनों देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा 10 अरब अमेरिकी डॉलर से आगे निकल चुका है। ओमान के गैर-तेल निर्यात में औद्योगिक सामान, धातु, मशीनरी, रसायन और प्लास्टिक जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनमें भारत एक प्रमुख बाजार है।
ओमान भारत की पश्चिम एशिया नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1955 में स्थापित हुए थे, जो बाद में रणनीतिक साझेदारी में बदल गए। ओमान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, अरब लीग और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन जैसे मंचों पर भी अहम भूमिका निभाता है।
रक्षा सहयोग के क्षेत्र में ओमान भारत का सबसे करीबी साझेदार माना जाता है। हाल के वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने मिलकर कई पहल की हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा से जुड़े संवाद लगातार होते रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग और मजबूत हुआ है।
इतिहास की बात करें तो ओमान के दिवंगत सुल्तान कबूस बिन सईद अल सईद का भारत से विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने भारत में शिक्षा प्राप्त की थी और भारतीय नेताओं के साथ उनके करीबी संबंध रहे। यही वजह है कि भारत और ओमान के रिश्ते केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर भी मजबूत माने जाते हैं।
पीएम मोदी का यह दौरा भारत-ओमान संबंधों को नई मजबूती देने और व्यापार, रक्षा तथा कूटनीतिक सहयोग को और आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।





