राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ बिल बना कानून, मुस्लिम संगठनों का विरोध

दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी है। अब यह कानून बन गया है, लेकिन इसे लागू करने की तारीख का ऐलान केंद्र सरकार अलग से करेगी। यह बिल पहले 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में पास हुआ था। दोनों सदनों में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद यह पास हुआ था।

वक्फ बिल पर अब सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लगाई गई हैं। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने इस कानून को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में हो रहे पक्षपात और अतिक्रमण को रोकना है। राज्यसभा में इस बिल को 128 सदस्यों ने समर्थन दिया था, जबकि 95 ने इसका विरोध किया।

वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस बिल के खिलाफ विरोध जताया है और कहा कि यह इस्लामी मूल्यों और भारतीय संविधान पर हमला है। AIMPLB ने कहा कि वे इस संशोधन को पूरी तरह से रद्द करने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस बिल पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने इसे मुसलमानों पर हमला बताया, जबकि महबूबा मुफ्ती ने इसे गलत बताया। वक्फ बिल पर जारी विरोध के बीच, अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां विपक्षी दलों ने इस कानून के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा-

वक्फ संशोधन बिल इस्लामी मूल्यों, धर्म और शरीयत, धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और भारतीय संविधान के आधारभूत ढांचे पर गंभीर हमला है। कुछ राजनीतिक दलों का भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को दिए गए समर्थन ने उनके तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मुखौटे को पूरी तरह से उजागर कर दिया है।

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