शिवसेना की 59वीं वर्षगांठ पर भिड़े उद्धव और शिंदे गुट, आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया सियासी माहौल

मुंबई।  शिवसेना के 59वें स्थापना दिवस पर मुंबई की राजनीति गरमा गई। पार्टी के दो धड़ों  उद्धव ठाकरे के शिवसेना (UBT) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट  ने अलग-अलग रैलियों में एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। दोनों गुटों ने बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा किया और एक-दूसरे को विश्वासघाती बताया।

उद्धव ठाकरे का ‘बॉलीवुड स्टाइल’ चैलेंज

सायन के शन्मुखानंद हॉल में हुई रैली में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे गुट पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “बालासाहेब ठाकरे के नाम और विचारधारा को मिटाने की साजिश हो रही है।” उन्होंने फिल्म ‘प्रहार’ के डायलॉग का हवाला देते हुए कहा, “आ जाओ, मुझे मार दो!” साथ ही तंज कसते हुए बोले, “अमिताभ बच्चन की ‘त्रिशूल’ की तरह एम्बुलेंस लेकर आना, क्योंकि तुम्हें उसकी ज़रूरत पड़ेगी।”

शिंदे का पलटवार: ‘जो मर चुका, उसे क्या मारना’

वर्ली के एनएससीआई डोम में हुई रैली में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव पर पलटवार करते हुए कहा, “जो पहले ही राजनीतिक रूप से मर चुका है, उसे क्या मारें?” उन्होंने उद्धव पर कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन कर हिंदुत्व छोड़ने का आरोप लगाया और कहा, “अगर बालासाहेब जीवित होते, तो उद्धव को इसकी सज़ा जरूर देते।”

शिवसेना की विरासत पर जारी है जंग

दोनों गुटों ने खुद को असली शिवसैनिक बताकर समर्थन जुटाने की कोशिश की। उद्धव ने जहां खुद को बालासाहेब के विचारों का सच्चा उत्तराधिकारी बताया, वहीं शिंदे ने उन्हें सत्ता की खातिर विचारधारा से समझौता करने वाला बताया। इस अवसर पर शिवसेना की सियासी विरासत को लेकर दोनों गुटों के बीच तनाव चरम पर रहा।

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