यूएई को ब्रिटिश शासन से मिली आजादी बिना किसी युद्ध के, जानिए कैसे हुआ ब्रिटिश राज का अंत

यूएई ने ब्रिटिश शासन का दौर तो देखा, लेकिन भारत की तरह इसे स्वतंत्रता के लिए लड़ाई नहीं लड़नी पड़ी। ब्रिटेन का यूएई पर कब्जा भी भारत जैसा पूर्ण और औपनिवेशिक नहीं था। UAE के सात शेखडम – अबू धाबी, दुबई, शारजाह, अजमान, उम अल-क्वैन, रास अल-खैमाह और फुजैराह – ट्रूसियल स्टेट्स के रूप में जाने जाते थे और इन पर ब्रिटिश नियंत्रण अनौपचारिक प्रोटेक्टोरेट के रूप में था।
ब्रिटेन ने यहां सीधे वायसराय नहीं रखा बल्कि बाहरी मामलों जैसे रक्षा, विदेश संबंध और समुद्री शांति पर ध्यान दिया। शेखों को आंतरिक मामलों में पूरी स्वतंत्रता दी गई थी, जिसमें कबीला विवाद, जमीन के झगड़े और घरेलू मामलों का संचालन शामिल था। 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटेन ने कई समुद्री संधियों के जरिए इस नियंत्रण की नींव रखी, जिसका मुख्य उद्देश्य समुद्री डकैती रोकना और भारत के व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना था।
तेल की खोज से पहले UAE एक गरीब और कम विकसित क्षेत्र था, जहां लोग मछली पकड़ने, मोती निकालने और खानाबदोश पशुपालन से जीविका चलाते थे। आर्थिक दृष्टि से इसे पूरी तरह से उपनिवेश बनाने में ब्रिटेन को फायदा नहीं था, इसलिए नियंत्रण हल्का और अधिक कूटनीतिक था।
UAE को ब्रिटेन से आजादी संघर्ष या क्रांति के बजाय शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए मिली। ब्रिटिश सेना के पीछे हटने का निर्णय 16 जनवरी 1968 को लिया गया और 1971 के अंत तक इसे लागू किया गया। इसके बाद नई सरकार ने भी इसे पुष्टि दी। यूएई 1971 में पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र बना और इन सात शेखडमों ने मिलकर संयुक्त अरब अमीरात की नींव रखी।
इस तरह यूएई को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली बिना किसी युद्ध या बड़े संघर्ष के, और ब्रिटेन का नियंत्रण क्षेत्र पर हल्का और रणनीतिक था, जो भारत के अनुभव से बिलकुल अलग था।





