भारत की रक्षा ताकत में दो बड़ी डील: जर्मनी से पनडुब्बियां, इजराइल से मिसाइलें

दिल्ली। भारत सरकार ने नौसेना और वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए दो बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। पहला सौदा जर्मनी से 6 एडवांस्ड पनडुब्बियों की खरीद का है, जिसकी कीमत लगभग  70 हजार करोड़ होगी।

यह सबमरीन प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत मझगांव डॉकयार्ड्स में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम के साथ बनाई जाएंगी। रक्षा मंत्रालय और जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के बीच बातचीत इस महीने के अंत तक शुरू हो सकती है। इन सबमरीन की खासियत यह होगी कि ये तीन हफ्ते तक पानी के नीचे रह सकेंगी और दुश्मन की नजर से बची रहेंगी।

दूसरी डील इजराइल से रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों की खरीद की है। यह सुपरसोनिक मिसाइल 150–250 किलोमीटर की दूरी तक सटीक वार कर सकती है। इसका इस्तेमाल पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमलों में किया जा चुका है। 570 किलो वजनी और 4.7 मीटर लंबी इस मिसाइल की गति मैक 2–3 तक है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है। इसे सुखोई-30MKI सहित कई फाइटर जेट्स से लॉन्च किया जा सकता है।

रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह की पनडुब्बियों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। अगले 10 वर्षों में भारतीय नौसेना पुरानी 10 पनडुब्बियों को बदलकर नई तकनीक वाली सबमरीन शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। वहीं, भारतीय वायुसेना सभी प्रमुख बेड़ों को रैम्पेज मिसाइलों से लैस कर उनकी मारक क्षमता और बढ़ाना चाहती है। इन सौदों से भारत की समुद्री और हवाई ताकत में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

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