कांकेर में मतांतरण को लेकर बवाल, कब्र से शव निकालने के बाद हिंसा, इलाके में धारा 144 लागू

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंदरूनी वनांचल क्षेत्र में मतांतरण को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर सामाजिक तनाव में बदल गया है। आमाबेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़े तेवड़ा में एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार को लेकर शुरू हुआ विवाद गुरुवार को हिंसक झड़प तक पहुंच गया। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने दफनाए गए शव को कब्र से बाहर निकलवाया, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

जानकारी के अनुसार सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरू राम के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया था। परिजनों का कहना है कि मृतक आदिवासी समाज से थे, लेकिन उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था। आरोप है कि गांव की परंपरागत सहमति और अनुमति के बिना चुपचाप कफन-दफन किया गया, जिससे आदिवासी समाज में नाराजगी फैल गई।

ग्रामीणों का विरोध बढ़ने पर शव को कब्र से बाहर निकालने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना था कि मत परिवर्तन करने वाले व्यक्ति का अंतिम संस्कार गांव के पारंपरिक पूर्वज स्थल पर नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।

घटना के दौरान दो पक्षों के बीच जमकर पथराव हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी और ग्रामीण घायल हो गए। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, लेकिन भीड़ उग्र हो गई। आरोप है कि उग्र ग्रामीणों ने तीन से चार चर्चों में तोड़फोड़ और आग लगाने की कोशिश भी की।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल हालात पर नजर रखी जा रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, मतांतरित लोगों के अंतिम संस्कार को लेकर जिले में पहले भी विवाद हो चुके हैं। अब तक चार मामलों में शवों का अंतिम संस्कार जिले की सीमा से बाहर कराना पड़ा है। पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

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