ये हैं छत्तीसगढ़ के कुछ प्रसिध्द पर्यटन स्थल, एक बार जरुर जाइएगा

रायपुर : छत्तीसगढ भारत देश का खूबसूरती से समृद्ध राज्य है… बडे-बड़े वन, सुसज्जित पारंपरिक लोक इतिहास, दुर्लभ प्राकृतिक संपदा, भव्य मंदिर और विलक्षण संस्कृति को संजोए हुए छत्तीसगढ अपने लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के लिए भी काफी मशहूर है… यह राज्य, देश में अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में 16वें स्थान पर आता है… इसके साथ ही इतिहास की दृष्टि से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ का वर्णन पवित्र रामायण तथा महाभारत दोनों में ही मिलता है..तो इसी छत्तीसगढ़ की सैर की जाए…
- चित्रकूट फॉल्स- छत्तीसगढ़ राज्य में वैसे तो कई पर्यटक स्थल मौजूद हैं परंतु उनमें चित्रकूट जलप्रपात का महत्व अधिक है… यह एक प्राकृतिक रूप से निर्मित झरना है जो कि छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले में पाया जाता है… यह जलप्रपात इस जिले में स्थित जगदलपुर क्षेत्र से 38 किलोमीटर दूर विद्यांचल पर्वत में बना हुआ है जो छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के बीच में पड़ने वाले क्षेत्र में पश्चिम की ओर बहने वाली इंद्रावती नदी पर फैला हुआ है.. और इसे भारत के सबसे चौड़े झरने के रूप में जाना जाता है… इस वजह से ही इसे भारत का ‘नियाग्रा फॉल्स’ भी कहा जाता है…. ये झरना मानसून के समय काफी अधिक तेजी से बहता है जोकि लगभग 100 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है और 150 मीटर तक चौड़ा दिखाई देता है…
- अचानकमार टाइगर रिजर्व – अचानकमार टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों में से एक है। यह क्षेत्र बिलासपुर जिले के मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर है। इस अभ्यारण्य को 1975 में निर्मित किया गया था। हालांकि यह 2009 में ही टाइगर रिजर्व घोषित हुआ है। यह अभ्यारण्य एक विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है जो 557 स्क्वायर किलोमीटर बताया जाता है… यहां पर आकर पर्यटक रोमांच से भरे हुए बेहतरीन अनुभवों का आनंद लेते हैं। इस क्षेत्र में जलप्रपातों के साथ-साथ वन्यजीवों की भी भरमार है। बाघ, भारतीय गिलहरी, लकड़बग्घा, भालू, तेंदुआ, बाइसन, जंगली कुत्ते होने के साथ-साथ यहां पर लगभग 150 पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं… इस पार्क की सैर करना पर्यटकों के अद्भुत अनुभवों में से एक है…
- भोरमदेव मंदिर – भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के मुख्य आकर्षणों में से एक है। यह मंदिर कवर्धा से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी वाले मैकाले पर्वत श्रेणी पर स्थित है। मंदिर उड़ीसा के कोणार्क सूर्य मंदिर के समान है जिस वजह से इसे सातवीं से बारहवीं शताब्दी के दौर में निर्मित माना जाता है। दरअसल भोरमदेव मंदिर अपनी दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी और वास्तुकला के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर से मिलता जुलता है जिस वजह से इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो नाम से भी संबोधित किया जाता है।
- सेतगंगा – सेतगंगा छत्तीसगढ़ राज्य के धार्मिक नगर के रूप में विख्यात है… सेतगंगा जिले में अवस्थित मुंगेली मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर यह स्थान प्राचीन समय से ही काफी प्रसिद्ध माना जाता है.. इसका एक बड़ा कारण है कि समूचे भारत में यह पहला ऐसा स्थान है जहां पर भगवान राम के द्वारपाल के रूप में रावण की पूजा की जाती है.. दरअसल इस स्थान पर भगवान श्री राम तथा माता सीता का एक भव्य मंदिर निर्मित है जो कि स्वयं में ही अपनी दिव्यता को प्रदर्शित करता है। परंतु इसकी खूबी तब और बढ़ जाती है जब यहां पर काले पत्थर में बड़ी ही खूबसूरती से निर्मित रावण की प्रतिमा की पूजा की जाती है… इस वजह से ही यह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है…
- मैनपाट – मैनपाट छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटक स्थलों में से एक है। यह क्षेत्र अपने सुहावने मौसम के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। मैनपाट छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी के साथ विंध्य पर्वत माला पर अवस्थित है। यह क्षेत्र समुद्र तट से लगभग 3781 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मैनपाट को अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुहावनी जलवायु के कारण ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ नाम से भी जाना जाता है.. यहां पर सुंदर जलप्रपातों के साथ कई आकर्षक नजारे और कुछ ऐसे स्थान पाए जाते हैं जो पर्यटकों को लगातार अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं। इनमें टाइगर प्वाइंट, मछली प्वाइंट, सरभंजा जलप्रपात आदि प्रमुख हैं।
- तीरथगढ़ झरना- तीरथगढ़ झरने कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित महत्वपूर्ण मनोरंजन स्थलों में से एक हैं। इस खूबसूरत झरने के शोर का अनुभव करने के अलावा, यह इको-टूरिज्म स्पॉट व्यस्त दैनिक दिनचर्या से क्वालिटी टाइम बिताने के लिए आदर्श है… यहां यात्रा का सर्वोत्तम समय:अक्टूबर से फरवरी के बीच है और आप यहां सड़क, रेल या हवाई मार्ग से भी पहुंच सकते हैं…
- राजिम – राजिम.. जिसे छत्तीसगढ़ की प्रयाग नगरी के नाम से भी जाना जाता है.. प्रसिद्ध राजिम नगरी, महानदी, पैरी नदी और सोंढूर नदी के त्रिवेणी संगम पर गरियाबंद जिले में स्थित है… यह छत्तीसगढ़ में सामाजिक, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है.. यहां पर नलवंशीय शासक विलासतुंग के द्वारा 7वीं 8वीं शताब्दी में निर्मित राजीव लोचन मंदिर स्थित है। साथ ही संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है जहां से पंचकोशी यात्रा का शुभारंभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त विशाल बटवृक्ष स्थित है जिसे कृष्ण वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है…
8. महाकोशल आर्ट गैलरी- ये आर्ट गैलरी, छत्तीसगढ़ की एक विरासत स्थल है, जहाँ स्थानीय कारीगरों की सभी कलाकृतियाँ देखने को मिलती हैं… रायपुर के मध्य में स्थित, यह आर्ट गैलरी अष्टकोणीय आकार में बनी है, जो विभिन्न देशों के पर्यटकों को आकर्षित करती है…और ये आर्ट गैलरी अपनी कलाकृति के लिए प्रसिध्द है…
- कैलाश और कोटमसर गुफा – छत्तीसगढ़ में कैलाश और कोटमसर गुफा विश्व की दूसरी सबसे लंबी गुफा है। इस गुफा की खोज 1993 में की गई थी और घने जंगलों के बीच इसकी आश्चर्यजनक दिखने वाली दीवारों के कारण यह मुख्य आकर्षण का केंद्र थी… अद्वितीय और आकर्षक होने के बावजूद, इस गुफा की गहराई में ऑक्सीजन की कमी के कारण इसकी खोज नहीं की जा सकती…
10. गड़िया पर्वत – कांकेर में गड़िया पर्वत सबसे ऊंचा पर्वत है और इसे कभी कंदरा राजवंश के राजा धर्म देव द्वारा राजधानी माना जाता था। इस पर्वत से जुड़ी कई कहानियां हैं जिन पर स्थानीय लोग दृढ़ता से विश्वास करते हैं, जो इसे छत्तीसगढ़ में घूमने के लिए एक आकर्षक जगह बनाता है… इस पहाड़ की खास बात ये है कि चढ़ने के लिए सीढ़ियां और सड़क दोनों का रास्ता है.और पहाड़ पर सोनई-रुपई नाम का एक तालाब भी है जिसका पानी कभी सूखता नहीं है… वहीं इस पहाड़ पर चढ़ते समय दो चट्टाने पड़ती हैं जिन्हें बैलेंसिंग रॉक कहा जाता है…





