कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन कुछ ही घंटे में टूटा, कांग्रेस ने 12 पार्षद निलंबित किए

दिल्ली। अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन कुछ ही घंटों में टूट गया। अंबरनाथ और अकोट नगर पालिका चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा ने कांग्रेस से हाथ मिलाया था, ताकि एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को स्थानीय स्तर पर सत्ता में आने से रोका जा सके। लेकिन गठबंधन ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया और दोनों दल विवादों में घिर गए।
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए थीं। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन सत्ता से बाहर रह गई। भाजपा और कांग्रेस ने शिंदे गुट को रोकने के लिए गठबंधन किया था, लेकिन राजनीतिक आलोचना बढ़ने के बाद कांग्रेस ने इस कदम से पीछे हटने का निर्णय लिया।
कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अंबरनाथ से जीते सभी 12 पार्षदों को भी निलंबित किया है। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि बीजेपी के साथ गठबंधन का कोई औपचारिक अनुबंध नहीं था और यह कार्रवाई बिना इजाजत के गठबंधन बनाने के कारण की गई।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थानीय नेता द्वारा ऐसा निर्णय लेना अनुशासन के खिलाफ है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फडणवीस ने पहले ही सभी स्थानीय गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश जारी कर दिए थे।
चुनाव में कुल 59 पार्षद निर्वाचित हुए। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने 27 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें हासिल कीं। NCP (अजित पवार गुट) ने 4 सीटें जीतीं। इस चुनाव में गठबंधन और सीटों के समीकरण ने स्थानीय राजनीति को अस्थिर कर दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना आगामी चुनावों में स्थानीय स्तर पर गठबंधनों की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
इस तरह, अंबरनाथ नगर परिषद का भाजपा-कांग्रेस गठबंधन महज कुछ घंटों में टूट गया और कांग्रेस ने अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए अपने नेताओं और पार्षदों को निलंबित कर दिया।





