डिजिटल और जियो-टैगिंग के साथ होगी जनगणना, मई 2026 से शुरू होकर 2027 तक पूरी प्रक्रिया

आगामी जनगणना को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की तैयारी की जा रही है। मई 2026 से शुरू होने वाली जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी और 2027 तक इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जबकि अंतिम आंकड़े 2028 में जारी किए जाएंगे। इस बार पूरी व्यवस्था मोबाइल एप और ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से संचालित होगी, ताकि लोगों में भरोसा बढ़े और वे बिना झिझक सही जानकारी उपलब्ध कराएं।

पिछली जनगणना के दौरान कई लोगों ने निजी जानकारी साझा करने में संकोच जताया था। सुरक्षा और डेटा के दुरुपयोग के डर से कई परिवारों ने अधूरी या गलत जानकारी दी थी। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर अधिक पारदर्शी किया जा रहा है। नागरिकों को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ के तहत वेब पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा।

पहले चरण में मकानों की सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक घर के सदस्यों का मूल विवरण एकत्र किया जाएगा। यह चरण एक आधार ढांचा तैयार करेगा, जिसके बाद दूसरे चरण में व्यक्ति आधारित विस्तृत जानकारी जैसे नाम, उम्र, लिंग, जाति, शिक्षा और आय आदि से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।

सर्वे टीम को तीन चरणों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह रहेगा कि वे लोगों को निर्भय होकर सही जानकारी देने के लिए प्रेरित कर सकें। कई बार लोग घर कच्चा या पक्का होने, रोजगार की स्थिति या आय संबंधी प्रश्नों के गलत जवाब देते हैं। ऐसे मामलों में सर्वे टीम को स्थिति का आकलन कर सही जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए जाएंगे।

अधिकारियों का कहना है कि जनगणना केवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यही आंकड़े सरकार की नीतियों और विकास योजनाओं की नींव बनते हैं। यदि परिवार, शिक्षा या रोजगार से जुड़ी जानकारी गलत दर्ज होती है तो बेरोजगारी, साक्षरता और गरीबी जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों पर सीधा असर पड़ता है।

डिजिटल व्यवस्था के तहत गणक अपने स्मार्टफोन पर एप के माध्यम से सीधे डेटा एंट्री करेंगे और जानकारी केंद्रीय सर्वर पर भेजी जाएगी। एप हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध रहेगा। अधिकतर सवालों के लिए पूर्व निर्धारित विकल्प होंगे, जिससे त्रुटियां कम होंगी और डेटा तेजी से प्रोसेस किया जा सकेगा। कागजी फॉर्म की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और अलग से स्कैनिंग या एंट्री की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तकनीकी दक्षता को ध्यान में रखते हुए सर्वे टीम को एप संचालन और डेटा एंट्री का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और सटीक तरीके से पूरी की जा सके।

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