तेलंगाना: जंगल कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा – 100 एकड़ जंगल को हर हाल में बहाल करें

हैदराबाद के कांचा गाचीबोवली इलाके में बिना अनुमति के पेड़ों की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि उसे किसी अन्य बात से आपत्ति नहीं है, लेकिन पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता है। अदालत ने तेलंगाना सरकार से स्पष्ट कहा कि उसकी पहली प्राथमिकता है कि 100 एकड़ जंगल को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

कोर्ट ने कहा – एक भी पेड़ नहीं कटना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि अब वहां एक भी पेड़ नहीं कटना चाहिए। अगली सुनवाई 15 मई को होगी, तब तक जंगल क्षेत्र में किसी भी तरह की कटाई पर रोक रहेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए जरूरी हुआ, तो हम परंपरागत रास्तों से हटकर भी निर्णय लेंगे।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन वीडियो का ज़िक्र किया, जिनमें जानवर आश्रय की तलाश में इधर-उधर भटकते दिखे। कोर्ट ने तेलंगाना के वाइल्डलाइफ वार्डन को निर्देश दिया कि प्रभावित वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाए जाएं।

बिना अनुमति पेड़ काटने पर सरकार को फटकार

कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को बिना अनुमति के पेड़ काटने पर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई योजना थी तो पहले कानूनी अनुमति लेनी चाहिए थी। जस्टिस गवई ने कहा कि अभी सबसे जरूरी काम 100 एकड़ जंगल की यथास्थिति को बहाल करना है।

इस मामले में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी आवाज उठाई थी। उन्होंने यूनिवर्सिटी कैंपस से लगे 400 एकड़ क्षेत्र को विकसित करने की सरकारी योजना का विरोध किया था। छात्रों के विरोध और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल को इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को गंभीर चिंता का विषय बताया।

 

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