स्वामी नंदाचार्य बोले – भारत को अखंड और सशक्त बनाने का मार्ग केवल सनातन संस्कृति ही है

बिलासपुर :प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वामी नंदाचार्य जी ने कहा कि भारत को यदि फिर से अखंड और सशक्त बनाना है तो हमें सनातन मार्ग को अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि सनातन पुनर्जागरण के उद्देश्य से 51 शिव कथाओं का आयोजन किया जाएगा।
स्वामी जी ने कहा, “सनातन का अर्थ है शाश्वत, चिरस्थायी और ज्ञानवर्धक। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग आज इसका बहुत सीमित और संकीर्ण अर्थ निकाल रहे हैं। हमारी सनातन संस्कृति ही भारत की असली पहचान है। लेकिन आज के समय में इसका क्षरण हो रहा है। लोग मंदिर जाना, व्रत-उपवास करना, कथा श्रवण और यज्ञ-अनुष्ठान जैसे कार्यों से दूर हो रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी हैं। व्रत, त्यौहार, यज्ञ, मंत्रोच्चारण, ब्रह्म मुहूर्त में जागना, शाकाहार, शिखा-तिलक आदि के पीछे गहराई से जुड़ी वैज्ञानिक सोच है। ये सभी जीवन को शुद्ध, सकारात्मक और अनुशासित बनाते हैं।
स्वामी नंदाचार्य ने कहा कि रामकथा, भागवत कथा, शिवकथा आदि जीवन में प्रेरणा और संस्कार लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मकता और सद्भावना फैलती है। योग, संगीत और कला भी हमारी सनातन धरोहर हैं, लेकिन आज कुछ लोग इन्हें भ्रमित तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 12 मई से खमतराई रोड स्थित रामा ग्रीन सिटी के पास शिव कथा पारायण शुरू हो चुका है, जो 19 मई तक चलेगा। यह कथा एक नए और संगीतमय स्वरूप में प्रस्तुत की जा रही है, जो लोगों को आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दे रही है।
“सनातन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना पर आधारित है,” स्वामी जी ने कहा। उन्होंने सभी से अपील की कि वे सनातन मूल्यों को अपनाएं और नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ें।





