भारत 2047 की परिकल्पना के साथ स्वदेशी मेले का शुभारंभ, विविध आयोजनों ने बांधा समां

साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित स्वदेशी मेले की शुरुआत भारत 2047 विषय पर आयोजित संगोष्ठी के साथ हुई। कार्यक्रम में स्वदेशी विचारधारा, आत्मनिर्भर भारत और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि स्वदेशी सोच के माध्यम से ही देश को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों ने विचार रखते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों, नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना आवश्यक है। कार्यक्रम में महिला उद्यमिता, तकनीकी क्षेत्र में स्वदेशी सोच और सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए गए।
मेले के अंतर्गत बच्चों के लिए रंग भरो, चित्रकला और शिशु वेशभूषा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। बच्चों ने प्रकृति, राष्ट्रभावना और स्वदेशी भारत की थीम पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न आयु वर्गों में आयोजित प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नाटक का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने सराहा। इसके साथ ही समाजिक समागम के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय लोगों को सम्मानित किया गया।
आयोजकों के अनुसार मेले के आगामी दिनों में भारत की संस्कृति, धरोहर और परंपराओं पर केंद्रित संगोष्ठियां, प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे आमजन को स्वदेशी सोच से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।





