सुप्रीम कोर्ट का ड्रग्स पर सख्त बयान,मास्टरमाइंड अक्सर पकड़ से बाहर

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नशीले पदार्थों की तस्करी और निर्माण से जुड़े मामलों में छोटे खिलाड़ी अक्सर गिरफ्तार होने, जबकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे बने रहने की सख्त टिप्पणी की। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने भारत में बढ़ती ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि कितने असली मास्टरमाइंड पकड़े गए और मादक पदार्थों के स्त्रोत कितने प्रभावी ढंग से खोजे गए।
जस्टिस सुंदरेश ने सुनवाई के दौरान कहा, “एनडीपीएस मामलों में, मास्टरमाइंड कभी गिरफ्तार नहीं होता। वे पीछे रहते हैं। ए, बी, सी, और डी पकड़े जाएंगे, लेकिन असली स्रोत कहां से आया, यह पता नहीं चलता।”
यह टिप्पणी गुरजीत सिंह की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसे पंजाब के लुधियाना में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मेथामफेटामाइन के बड़े पैमाने पर निर्माण और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। फरवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज की थी। अदालत ने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, वित्तीय ट्रेल और डिजिटल फारेंसिक्स को दिखाते हुए कहा कि सिंह सक्रिय रूप से अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा था, जो एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 (अपराधी साजिश) के अंतर्गत आता है।
सुप्रीम कोर्ट ने नशीली दवाओं के मामलों में गिरफ्तारी के पैटर्न पर चिंता जताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सच जानने के बावजूद असली मास्टरमाइंड पकड़ से बाहर रहते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की जमानत याचिका स्वीकार करने से इनकार किया, लेकिन उन्हें इसे वापस लेने की अनुमति दी, ताकि वे ट्रायल कोर्ट में राहत की मांग कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न केवल ड्रग्स तस्करी के मामलों में न्यायपालिका की चिंता को दर्शाती है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर करती है।





