वोटर रोल SIR में बाधा नहीं डाले बंगाल सरकार-सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा: रुकावटें खुद हटाएंगे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा न डाले। कोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रक्रिया में कोई अड़चन आती है तो उसे खुद दूर किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने दो टूक कहा,

“हम रुकावटें हटा देंगे, लेकिन SIR को पूरा करने में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी। इस पर हमें पूरी तरह स्पष्ट रहना होगा।”

ERO नियुक्ति और माइक्रो-ऑब्जर्वर पर चिंता

मामले में पेश सीनियर वकील डी.एस. नायडू ने इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ERO क्वासी-ज्यूडिशियल काम करते हैं, इसलिए उन्हें प्रशिक्षित और योग्य होना चाहिए। उन्होंने दलील दी कि सिर्फ 64 अधिकारियों को ही निर्णय का अनुभव था, जबकि बाकी को केवल वेतन-समता के आधार पर चुना गया, जबकि SIR के फैसले अपील फोरम में चुनौती योग्य होते हैं।

कोर्ट ने माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका पर भी चिंता जताई। सीनियर वकील श्याम दीवान ने कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर के जरिए बड़े पैमाने पर वोटर के नाम हटाना संभव नहीं है।

अधिकारियों की सूची पर विवाद

सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से अधिकारियों के नाम मांगे ही नहीं थे। इस पर दीवान ने कोर्ट को बताया कि 8,500 अधिकारियों की सूची अब जमा कर दी गई है और उसे स्वीकार किया जाए।

CJI ने तुरंत पूछा कि क्या सूची में अधिकारियों के नाम, पदनाम और पोस्टिंग स्थान शामिल हैं, और क्या वे अगले ही दिन संबंधित ERO को रिपोर्ट कर सकते हैं। दीवान ने हां में जवाब दिया।

हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से नायडू ने कहा कि आयोग को ऐसी कोई पूरी सूची नहीं मिली। उन्होंने बताया कि शनिवार को मिले दस्तावेज़ों में ये विवरण मौजूद नहीं थे। इस पर दीवान ने दावा किया कि जिलेवार जानकारी दी गई थी, जिसे नायडू ने नकार दिया।

देरी और तैनाती पर कोर्ट की नाराजगी

CJI ने कहा कि अधिकारियों के नाम 4 या 5 फरवरी को ही दिए जा सकते थे। दीवान ने जवाब दिया कि राज्य को कुछ समय लगा। कोर्ट ने कहा कि अब भी पूरी सूची उपलब्ध नहीं है और अधिकारियों को डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) को रिपोर्ट करना होगा।

वोटर मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी

CJI ने मैप किए गए और बिना मैप किए गए वोटरों को लेकर सवाल उठाए। दीवान ने बताया कि लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (LD) मामलों में 50% से ज्यादा गड़बड़ियां सिर्फ स्पेलिंग की छोटी गलतियों के कारण थीं। इस पर CJI ने सवाल किया कि क्या करीब 70 लाख वोटर सिर्फ स्पेलिंग एरर की वजह से LD कैटेगरी में आ गए।

आंकड़े और समयसीमा

दीवान के मुताबिक, SIR प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी है।

  • ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में कुल 7.08 करोड़ वोटर
  • 6.75 करोड़ वोटरों की पहचान पहले ही हो चुकी है
  • करीब 32 लाख वोटरों की पहचान अभी बाकी
  • 1.36 करोड़ वोटर लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी प्रक्रिया से पहचाने गए

सुनवाई की शुरुआत में CJI ने कहा कि कोर्ट पहले यह देखेगा कि पिछले आदेशों का पालन हुआ या नहीं। यह सुनवाई पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिकाओं पर हो रही है।

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