छत्तीसगढ़ पाए जाते हैं ऐसे पत्थर, जिन्हें रगड़ने से आती है हड्डियों की महक

रायपुर: दुनिया में कई प्रकार के पत्थर पाए जाते हैं… जिनकी अलग अलग तरह की खासियत होती है.. कुछ रंग- बिरंगे.. तो कुछ आकार में बहुत बड़े… लेकिन क्या आप जानते हैं…हमारा छत्तीसगढ़, जो अपनी प्राकृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है… वहां एक खास तरह पाया जाता है… जिसे जलाने पर हड्डियों की महक आती है…
जी हां.. ये खास तरह के पत्थर, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 80 कि.मी दूर.. ग्राम खडगांव के रक्षा हड़ा पहाड़ी में पाया जाता है… जहां पहाड़ियों के उचाई से गिरती खूबसूरत पतली धार वाली झरना के बीच में ये पत्थर है… ये पत्थर देखने में तो बिल्कुल सामान्य लगते हैं लेकिन इन पत्थरों को जब जलाया जाता है या आपस में रगड़ा जाता है तो इनसे हड्डियों जैसी महक आती है. जी हां, आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं इस पत्थर को रगड़ने या जलाने से हड्डी की खुशबू आती है।भारत में इस तरह की यह एकमात्र पहला पत्थर है जिसके जलने से हड्डी की खुशबू आती है।
हालांकि इस क्षेत्र के ग्रामीनों से बात की तो ग्रामीण इस पत्थर को चमत्कारिक तो नहीं मानते। बल्कि उनके अनुसार अंतागढ़ क्षेत्र में विशाल काय दानव था हुए करता था, जिसने इस क्षेत्र के दूर-दूर तक की जिवी को हवा से ही खींच कर खा जाता था। इसलिए इस क्षेत्र में किसी प्रकार की जीवों की वास नहीं थी। इसे तंग आकर ग्रामीण भागने लगे थे। उसी दौरान वनवास में बस्तर में आए भगवान श्री राम को पता चला तो वह उसे रावघाट की पहाड़ में चढ़ कर तीर चलाया था। परंतु वह विशालकाय आदम खोर दानव दोबारा जीवित न हों जाए इसलिए उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए। बताया जाता है कि आज से लगभग 50 साल पहले यह पत्थर नहीं बल्कि पूरी तरह हड्डी के रूप में दिखता था जिसे काटने या तोड़ने पर खून की बास करता था और लाल रंग की खून जैसा पानी भी निकलता था।
मध्य छत्तीसगढ़ में करीब 5 साल बिताने के बाद भगवान श्री राम कंक ऋषि के आश्रम की ओर बढ़े। वर्तमान में ये इलाका कांकेर के कहलाता है। यहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार यहां से गुजरते हुए धनौरा पहुंचे। यहां सैकड़ों राक्षसों का वध करने का नारायणपुर होते हुए छोटे डूंगर पहुंचे, यहां से बारसूर होते हुए चित्रकूट गए, यहां चौमास बिताने के बाद इंद्रावती नदी के तट पर बसे गांव नारायण पाल गए यहां से जगदलपुर होते हुए कूटूबसर की ओर चले गए थे। मतलब खड़गांव के ग्रामीणों के मुताबिक क्षत्रिय राजा के द्वारा राक्षस को मारा गया था। कहा जा सकता है की खड़गांव में स्थित रक्षाहाड़ा के राक्षस को श्री राम ने ही मारा था। शोधकर्ता के अनुसार में भी ये कहा जाता है कि इस क्षेत्र से राम लक्ष्मण और सीता ने वनवास के दौरान गुजरे थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इस पत्थर की शोध कर्ताओं ने शोध भी किया था पर आज तक इसकी सच्चाई का पता नहीं चल सक।





