दिल्ली में BS6 से पुराने वाहनों पर सख्ती, जानिए कब लागू हुआ मानक और कैसे होती है पहचान

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और जहरीले स्मॉग को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब राजधानी में BS6 से पुराने मानक वाले वाहनों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बाहर से आने वाले ऐसे वाहन अगर दिल्ली में दाखिल होते हैं, तो उन्हें सीज किया जा सकता है। इसके साथ ही जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें तय तारीख से पेट्रोल और डीजल भी नहीं दिया जाएगा।
BS6 यानी भारत स्टेज-6 देश का सबसे नया और सख्त उत्सर्जन मानक है। इस मानक के तहत बने वाहन पुराने मॉडलों की तुलना में काफी कम प्रदूषण करते हैं। BS6 इंजन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बेहद कम हो।
भारत में BS6 मानक को दो चरणों में लागू किया गया। पहला चरण 1 अप्रैल 2020 से लागू हुआ, जिसके बाद सभी वाहन निर्माताओं को केवल BS6 मानक वाले वाहन बनाने और बेचने की अनुमति दी गई। इसके बाद 1 अप्रैल 2023 से BS6 फेज-2 लागू हुआ, जिसमें रियल ड्राइविंग एमिशन पर ज्यादा जोर दिया गया और वाहनों में ऑन बोर्ड डायग्नोस्टिक सिस्टम को अनिवार्य किया गया, ताकि उत्सर्जन पर रियल टाइम नजर रखी जा सके।
BS6 से पहले देश में BS4 मानक वाले वाहन चलन में थे, जो अप्रैल 2017 से लागू हुए थे। इससे पहले BS3, BS2 और BS1 मानक मौजूद थे, जिनमें प्रदूषण नियंत्रण के नियम अपेक्षाकृत ढीले थे। पुराने जमाने की कई कारें और दोपहिया वाहन इन्हीं मानकों के तहत बने थे, जो मौजूदा नियमों के हिसाब से ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।
दिल्ली में अब बाहरी राज्यों से आने वाले सभी गैर-BS6 वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है, चाहे वह निजी हों या व्यावसायिक। हालांकि, कुछ जरूरी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को छूट दी जा सकती है। दिल्ली में पहले से रजिस्टर्ड पुराने वाहनों पर पहले से लागू नियम और प्रतिबंध यथावत रहेंगे।
सरकार का कहना है कि इन सख्त फैसलों का मकसद राजधानी की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना और लोगों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से बचाना है।





