अमृत-2.0 परियोजनाओं की कड़ी निगरानी शुरू, लापरवाही पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट

मध्य प्रदेश में अमृत-2.0 मिशन के अंतर्गत पेयजल और सीवरेज परियोजनाओं की संभागवार निगरानी शुरू कर दी गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने राज्य स्तर पर अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और गति पर लगातार नजर रखी जा सके।
परियोजनाओं के क्रियान्वयन में खामियां पाए जाने पर संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। वहीं, कार्य से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभाग द्वारा विशेष निगरानी सेल गठित किया गया है, जो सिविल और तकनीकी कार्यों की अलग-अलग समीक्षा कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेज रहा है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त ने कई परियोजनाओं में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ड्राइंग और डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों और पीडीएमसी टीम की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाओं में विलंब हो रहा है। ऐसे मामलों में डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोषी पाए जाने पर उन्हें भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। परियोजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, डिजिटल रिपोर्टिंग और पोर्टल आधारित समीक्षा से जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
नगरीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति प्रतिदिन पोर्टल पर अपडेट करें तथा बिना पूर्व अनुमति किसी भी परियोजना में समय सीमा बढ़ाने की अनुमति न दें। हाल ही में धीमी प्रगति के चलते 13 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और छह को निलंबित किया जा चुका है।
प्रदेश के कई नगरीय निकायों में सीवरेज और पेयजल परियोजनाओं की स्थिति अभी भी खराब बनी हुई है। कई शहरों में न तो पेयजल आपूर्ति का कार्य पूरा हो सका है और न ही सीवरेज लाइन बिछाई जा सकी है। इंदौर और भोपाल सहित अन्य प्रमुख शहरों में भी परियोजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई है।
सरकार का उद्देश्य कड़ी निगरानी के माध्यम से परियोजनाओं को समय पर पूरा कर आम जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।





