धर्मांतरण पर सख्त कानून: उम्रकैद तक सजा, 25 लाख तक जुर्माना और शादी भी हो सकती है अमान्य

छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित कर दिया गया है, जिसके तहत अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। नए कानून के अनुसार, धोखे, प्रलोभन, दबाव या गलत जानकारी देकर धर्मांतरण कराने पर दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जा सकती है और जुर्माना कम से कम 10 लाख रुपए होगा। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पहले भी धर्मांतरण के मामले में दोषी पाया जा चुका है और दोबारा ऐसा करता है, तो उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। धर्मांतरण में सहयोग करने वालों के लिए भी 6 महीने से 3 साल तक की सजा और 2 लाख रुपए तक का जुर्माना तय किया गया है।
नए कानून के तहत स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को सूचना देनी होगी। यह नियम धर्मांतरण कराने वाले पुजारी, मौलवी या पादरी पर भी लागू होगा। बिना सूचना के कराया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा और तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
विवाह के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने पर भी सख्ती की गई है। यदि कोई शादी केवल धर्मांतरण के लिए की गई पाई जाती है, तो अदालत उसे शून्य घोषित कर सकती है। ऐसे मामलों में जोड़े को पहले से अपने इरादे की जानकारी प्रशासन को देनी होगी, जिसकी जांच जिला मजिस्ट्रेट करेंगे।
विधेयक में विदेशी फंडिंग के जरिए धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसी संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालत गठित की जाएगी, जहां छह महीने के भीतर मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का कहना है कि यह कानून बलपूर्वक और धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है, जबकि विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए अधिक व्यापक चर्चा की मांग की।





