Story of Success : छत्तीसगढ़ की बेटी निशा यादव ने रचा इतिहास, 5895 मीटर चोटी किलिमंजारो पर लहराया तिरंगा

रायपुर : क्या आपने कभी सोचा है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सपनों के प्रति समर्पण आपको कहां तक ले जा सकता है? छत्तीसगढ़ की बेटी निशा यादव ने इसका जीता-जागता उदाहरण पेश किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निशा को अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊँची 5895 मीटर चोटी किलिमंजारो फतह करने पर बधाई दी है। आइए जानते हैं निशा की इस प्रेरणादायक यात्रा के बारे में, जिसने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।
निशा यादव, संकल्प, संघर्ष और सफलता की मिसाल
CM विष्णु देव ने निशा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने कहा, “निशा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर संकल्प और समर्पण हो, तो कोई भी शिखर असंभव नहीं है।” निशा ने अफ्रीका के सबसे ऊँचे पर्वत पर भारत का तिरंगा लहराकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री का समर्थन और योगदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले बिलासपुर में निशा से मुलाकात हुई थी। निशा के संकल्प और जुनून को देखकर मुख्यमंत्री साय ने उसे 3.45 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की थी, ताकि वह अपने सपने को साकार कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा, “आज जब निशा ने किलिमंजारो पर विजय प्राप्त कर तिरंगा फहराया है, तो यह साबित हो गया है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।”
संघर्षों भरी रही निशा की यात्रा
निशा यादव का सफर आसान नहीं था। बिलासपुर जिले के एक ऑटो चालक की बेटी होने के बावजूद निशा ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया। उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि अगर आपके पास हौसला है, तो कोई भी बाधा आपके रास्ते में नहीं आ सकती।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
मुख्यमंत्री ने कहा, “निशा की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के असंख्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह संदेश देती है कि अगर आपमें जज़्बा और समर्पण है, तो कोई भी कठिनाई आपको अपने लक्ष्य तक पहुँचने से रोक नहीं सकती।”
सरकार का समर्थन और भविष्य की योजनाएँ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेल और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश की बेटियों को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।





