12 मार्च तक ईरान-इजराइल युद्ध में सीजफायर की अटकलें तेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के बाद ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध को लेकर सीजफायर की अटकलें तेज हो गई हैं। ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की है, जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में युद्धविराम की घोषणा हो सकती है।
दरअसल, पिछले वर्ष भी 12 दिन तक चले इजराइल-ईरान संघर्ष के दौरान ट्रंप ने इसी तरह का “बिना शर्त सरेंडर” वाला पोस्ट किया था। उस पोस्ट के छह दिन बाद 23 जून 2025 को दोनों देशों के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ था। इसी वजह से यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि वही पैटर्न दोहराया गया तो 12 मार्च के आसपास युद्धविराम की घोषणा संभव हो सकती है।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बिना शर्त सरेंडर के अलावा कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में एक स्वीकार्य नेतृत्व के चयन के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान को आर्थिक रूप से फिर से मजबूत बनाने के लिए काम करेंगे।
हालांकि मौजूदा संघर्ष को पिछले साल की लड़ाई से कहीं ज्यादा गंभीर माना जा रहा है। यह युद्ध कई देशों तक फैल चुका है और इसके कारण खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात भी प्रभावित हुआ है। साथ ही कई अमेरिकी सैनिकों की मौत और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान की ओर से भी फिलहाल युद्ध रोकने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि मध्यस्थता करने वाले देशों को उन लोगों पर दबाव डालना चाहिए जिन्होंने ईरानी जनता को कमतर समझकर यह संघर्ष शुरू किया है।
पिछली बार युद्धविराम कराने में कतर ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग बताई जा रही हैं। ईरानी ड्रोन हमले के बाद कतर की रास लफान गैस सुविधा प्रभावित हुई है और उसने एलएनजी निर्यात पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि वह दोबारा मध्यस्थता की भूमिका निभा पाएगा या नहीं।
फिलहाल 12 मार्च तक कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन अभी तक किसी देश ने खुलकर मध्यस्थता की पहल नहीं की है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर क्या प्रयास होते हैं और क्या वास्तव में इस संघर्ष का अंत निकट है।





