अमेरिका की हेल्थ डील पर छोटे देशों का इंकार, डेटा सुरक्षा को दी प्राथमिकता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित स्वास्थ्य समझौतों को लेकर कुछ अफ्रीकी देशों ने सख्त रुख अपनाया है। घाना और जिम्बाब्वे ने ऐसे प्रस्तावों को ठुकरा दिया है, जिनमें वित्तीय सहायता के बदले नागरिकों के संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा तक पहुंच मांगी जा रही थी। इन देशों ने साफ किया कि राष्ट्रीय हित और नागरिकों की गोपनीयता से समझौता स्वीकार नहीं है।
डेटा एक्सेस की शर्तों पर आपत्ति
घाना ने प्रस्तावित हेल्थ डील को इसलिए अस्वीकार कर दिया क्योंकि इसमें अमेरिकी संस्थाओं को पर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों के बिना नागरिकों के स्वास्थ्य डेटा तक पहुंच देने की बात शामिल थी। अधिकारियों के अनुसार, मांगा गया डेटा दायरा जरूरत से अधिक था और इससे लोगों की पहचान उजागर होने का खतरा था। इस आधार पर समझौते को खारिज कर दिया गया।
आर्थिक मदद के बदले डेटा की मांग
प्रस्तावित समझौते के तहत घाना को कई वर्षों में करोड़ों डॉलर की फंडिंग मिलने की बात थी। इसके बदले अमेरिका स्वास्थ्य प्रणाली को समर्थन देने और बीमारियों से निपटने के नाम पर डेटा एक्सेस चाहता था। हालांकि घाना ने इसे नागरिकों की गोपनीयता के लिए जोखिमपूर्ण मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
जिम्बाब्वे ने भी अपनाया यही रुख
इससे पहले जिम्बाब्वे भी इसी तरह के प्रस्ताव को ठुकरा चुका है। वहां के अधिकारियों ने हेल्थ डेटा की संप्रभुता और सुरक्षा को आधार बनाते हुए समझौता नहीं किया। अन्य कुछ देशों में भी इस तरह के प्रस्तावों को लेकर पुनर्विचार की स्थिति बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि डेटा सुरक्षा अब अंतरराष्ट्रीय समझौतों में एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रही है।





