यूटेथ्रल स्ट्रिक्चर के इलाज में आयुर्वेदिक उत्तरबस्ती पद्धति पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन, सीसीआरएएस की मंजूरी

यूटेथ्रल स्ट्रिक्चर यानी मूत्र मार्ग संकुचन जैसी जटिल और बार-बार उभरने वाली बीमारी के इलाज में आयुर्वेद की उत्तरबस्ती चिकित्सा पर अब वैज्ञानिक शोध किया जाएगा। इस पद्धति से एक मरीज में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ने शोध परियोजना को मंजूरी दे दी है।

इस शोध के लिए लगभग 12.97 लाख रुपये का फंड स्वीकृत किया गया है। अध्ययन क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर की देखरेख में किया जाएगा और इसकी अवधि 18 माह तय की गई है। शोध के दौरान यूटेथ्रल स्ट्रिक्चर से पीड़ित 20 से 25 मरीजों को शामिल कर उत्तरबस्ती चिकित्सा की प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन किया जाएगा।

शोध कार्य की निगरानी संस्थान के अनुसंधान अधिकारी करेंगे, जबकि अध्ययन का क्रियान्वयन उज्जैन में किया जाएगा। इससे पहले 35 वर्षीय युवक पर उत्तरबस्ती चिकित्सा से किए गए उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे, जिसे आयुर्वेदिक शोध पत्रिका में भी प्रकाशित किया गया है।

चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार यह बीमारी प्रति एक लाख पुरुषों में लगभग 300 को प्रभावित करती है और अधिकतर मामले 35 से 55 वर्ष की आयु के पुरुषों में देखे जाते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह समस्या पेशाब से जुड़ी गंभीर दिक्कतों और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस शोध से उत्तरबस्ती चिकित्सा को वैज्ञानिक आधार मिलेगा। यदि अध्ययन के नतीजे सकारात्मक रहे, तो यह पद्धति भविष्य में यूटेथ्रल स्ट्रिक्चर के इलाज का एक प्रभावी और वैकल्पिक उपचार विकल्प बन सकती है।

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