Scam game in Ayushman: आयुष्मान भारत योजना के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट, जांच के नाम पर केवल खानपूर्ति

बिलासपुर। आयुष्मान भारत योजना, जो गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी थी, अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरी हुई है। करोड़ों रुपये की बंदरबांट के आरोप तो हैं ही, साथ ही अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने का भी मामला सामने आया है। हैरानी की बात तो यह है कि जांच के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है, और सवाल उठ रहे हैं कि क्या सचमुच कोई ठोस कार्रवाई होगी? बिलासपुर जिले में साल 2021-22 के दौरान आयुष्मान भारत योजना के लिए करीब 8-9 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। लेकिन चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि इनमें से 25% राशि फर्जी आईडी और अपात्र कर्मचारियों पर खर्च की गई।

नोडल अधिकारी पर करीब 40 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा है। शिकायत के बाद अधिकारी को भले ही बदल दिया गया, लेकिन गबन की रकम अब तक वसूली नहीं गई है। अपात्र लोगों से भी पैसे वापस लेने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यह मामला यहीं नहीं रुकता। आरोप है कि फर्जी आईडी बनाकर लाखों रुपये की राशि हड़प ली गई और इसके अलावा 250 करोड़ रुपये की नियमविरुद्ध उपकरण खरीदी भी की गई। नए नोडल अधिकारी के कार्यकाल में भी यह फर्जीवाड़ा जारी रहा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर भ्रष्टाचार का एक और गंभीर मामला उजागर हुआ है।

सवाल यह उठता है कि जिन योजनाओं को गरीबों की भलाई के लिए लाया गया था, क्या वे अब भ्रष्टाचार का शिकार हो चुकी हैं? क्या प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की महती योजना, जो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का वादा करती थी, अब घोटालों और फर्जीवाड़े के कारण मटियामेट हो रही है? क्या जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है और कड़ी कार्रवाई की बजाय यह मामला भी राजनीति और प्रशासन की धूल में दबकर रह जाएगा?

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