गाइडलाइन दरों में बड़ा संशोधन: रियल एस्टेट को मिली नई रफ्तार

रायपुर। विष्णुदेव साय सरकार द्वारा संपत्ति की गाइडलाइन दरों में किया गया संशोधन राज्य की रियल एस्टेट व्यवस्था में वर्षों बाद आया एक बड़ा और निर्णायक बदलाव माना जा रहा है। 2017-18 के बाद पहली बार दरों की व्यापक समीक्षा कर उन्हें बाजार की वास्तविक स्थिति के करीब लाया गया है, जिससे पारदर्शिता, स्थिरता और निवेश माहौल में सुधार देखने को मिल रहा है।
पुरानी व्यवस्था की चुनौती
लंबे समय तक दरों का अद्यतन न होने से रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक बाजार मूल्य में बड़ा अंतर पैदा हो गया था।
- किसानों को अधिग्रहण के समय कम मुआवजा मिलता था
- बैंक लोन मूल्यांकन वास्तविक कीमत को नहीं दर्शाता था
- लेन-देन में पारदर्शिता की कमी और अनौपचारिक भुगतान जैसी समस्याएं बढ़ रही थीं
वैज्ञानिक आधार पर नई दरें
सरकार ने जिलेवार बिक्री आँकड़ों, राजस्व रिकॉर्ड, बाजार डेटा और ग्राउंड सर्वे के आधार पर 20 नवंबर 2025 से नई दरें लागू कीं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह 100% से अधिक संशोधन
- कुछ पिछड़े इलाकों में 300% तक समायोजन
- शहरी क्षेत्रों में भी बाजार के अनुरूप संतुलन
रायपुर और रायगढ़ के कुछ हिस्सों में 400-500% तक वृद्धि पर जनता की चिंता के बाद 30 जनवरी 2026 से राहत संशोधन लागू कर औसत वृद्धि को 100% के दायरे में संतुलित किया गया।
बाजार में लौटा विश्वास
रियल एस्टेट संगठनों के अनुसार:
- प्लॉट और हाउसिंग यूनिट्स की मांग में 12-17% वृद्धि
- होम लोन स्वीकृतियों में लगभग 14% बढ़ोतरी
- 2026 की पहली तिमाही में नए प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन में 22% वृद्धि
किसानों और निवेशकों को लाभ
नई दरों से अधिग्रहण के दौरान मुआवजा औसतन 25-40% तक बढ़ने की संभावना है। बैंकिंग सेक्टर को भी सटीक मूल्यांकन में सुविधा मिल रही है, जिससे ऋण स्वीकृति प्रक्रिया तेज हुई है।
विकास को मिलेगा बल
संतुलित गाइडलाइन ढांचे से राज्य का राजस्व अधिक स्थिर हुआ है, जिससे सड़क, जल आपूर्ति, बिजली और शहरी विस्तार परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्धता बढ़ेगी।
यह निर्णय केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया का सुधार नहीं, बल्कि भूमि प्रबंधन को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार इसे सुशासन और विकास की दीर्घकालिक रणनीति का अहम स्तंभ बता रही है।





