छत्तीसगढ़ में बढ़ी रजिस्ट्री दरों का रियल एस्टेट सेक्टर ने किया विरोध, मंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल:जल्द मिल सकता है समाधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट सेक्टर इन दिनों रजिस्ट्री पंजीयन दरों में भारी बढ़ोतरी को लेकर नाराज है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट ब्रोकर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। गुरुवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश आर्य के नेतृत्व में ब्रोकरों ने मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात की और कहा कि कई क्षेत्रों में 500% से 900% तक बढ़ी हुई रजिस्ट्री दरें बिल्कुल अव्यवहारिक हैं।
ब्रोकर्स ने बताया कि मध्य प्रदेश के बड़े शहर—इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर—जिनकी विकास गति छत्तीसगढ़ से धीमी है, वहां केवल 10% से 20% तक की वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ के अभनपुर तहसील के बेंद्री और निमोरा जैसे इलाकों में 500–700% तक की वृद्धि कर दी गई है। उनका कहना है कि ऐसा कोई भी मानक नहीं है जो इतनी बढ़ोतरी को सही ठहरा सके।
प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई, पुणे और नासिक का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट शहरों में भी इस साल मात्र 4% की वृद्धि हुई है। जबकि छत्तीसगढ़ के गोबरा नवापारा क्षेत्र में 700–900% तक की बढ़ोतरी कर दी गई, जिससे खरीदार, निवेशक और ब्रोकर्स सभी परेशान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित राज्य है, जहां भूमि और विकास कार्य पहले से चुनौतीपूर्ण हैं, ऐसे में इतनी ज्यादा पंजीयन दरें व्यावहारिक नहीं हैं।
आरडीए से जुड़े मामलों पर भी जताई नाराजगी
मुलाकात के दौरान एसोसिएशन ने आरडीए के दो लंबे समय से लंबित मामलों पर भी चिंता व्यक्त की।
- पहला, वर्ष 2017 में बोरिया खुर्द क्षेत्र में 200 गरीब परिवारों को मकान आवंटित किए गए थे, लेकिन 8 साल बाद भी उन्हें न तो पोज़ेशन मिला और न ही लेटर।
- दूसरा, हाल ही में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 150 फ्लैटों का आवंटन पूरा होने के बावजूद एक महीने से घोषणा नहीं हुई है। इससे लाभार्थी परेशान हैं।
मंत्री ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
ब्रोकरों की बात सुनने के बाद मंत्री ओपी चौधरी ने आश्वासन दिया कि रजिस्ट्री दरों की समस्या पर जल्द समाधान निकाला जाएगा। साथ ही, आरडीए से जुड़े लंबित मामलों पर भी तुरंत कार्रवाई करने का भरोसा दिया।
रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि यदि पंजीयन दरों में तार्किक संशोधन नहीं हुआ, तो प्रदेश में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर बड़ा असर पड़ेगा और रोजगार पर भी संकट आ सकता है। फिलहाल पूरा सेक्टर सरकार के अगले कदम का इंतज़ार कर रहा है।





