प्रदेश की जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा, मारपीट की घटनाएं बढ़ीं

रायपुर। प्रदेश की जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से काफी ज्यादा हो गई है। सबसे बड़ी जेल रायपुर सेंट्रल जेल में ही क्षमता से दोगुने से ज्यादा कैदी रखे गए हैं। इस वजह से जेलों में मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

रायपुर सेंट्रल जेल की आवास क्षमता 1586 कैदियों की है, लेकिन वहां पर वर्तमान में 3291 कैदी रह रहे हैं। इसी तरह प्रदेश की कुल 33 जेलों में 14733 कैदियों की क्षमता है, लेकिन 18525 कैदी रखे गए हैं। यानी प्रदेश की ज्यादातर जेलें ओवरलोडेड हैं।

मारपीट और अन्य घटनाएं बढ़ीं

पिछले एक साल में प्रदेश की 9 बड़ी जेलों में 97 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें कैदियों के बीच मारपीट, यौन उत्पीड़न और अन्य आपराधिक गतिविधियां शामिल हैं। ये घटनाएं दुर्ग, अंबिकापुर, रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, बैकुंठपुर, राजमानुजगंज, महासमुंद, बलौदाबाजार और सारंगढ़ की जेलों में हुई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी होने के कारण तनाव और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए जेल प्रशासन को उचित कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही, सरकार को भी जेलों में सुधार और क्षमता बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।

 

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