जहरीली महुआ शराब का कहर, शराब में मिलावट से बन रही मौत की वजह,

बिलासपुर: बिलासपुर के लोफंदी गांव में जहरीली महुआ शराब पीने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के बढ़ते कारोबार की हकीकत उजागर कर दी है। बिना किसी मानक के बनने वाली यह देसी शराब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। पिछले 13 महीनों में पुलिस ने 29,569 लीटर महुआ शराब जब्त की, जबकि आबकारी विभाग ने सिर्फ 1,591 लीटर। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि प्रशासन की पकड़ कितनी कमजोर है। आखिर क्यों हर साल जहरीली शराब से मौतें हो रही हैं?

महुआ शराब आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक रूप से बनाई जाती है, लेकिन अब यह मौत का कारोबार बन गई है। सरकारी देसी शराब से सस्ती होने के कारण इसकी मांग अधिक है, और ज्यादा मुनाफे के लालच में इसमें यूरिया, नौसादर और अन्य जहरीले केमिकल मिलाए जा रहे हैं। यही वजह है कि यह शराब अब जानलेवा साबित हो रही है। लोफंदी गांव की घटना इसका ताजा उदाहरण है, जहां 9 लोगों की मौत हो गई, हालांकि इक मामले में पुलिस का कहना था कि अलग अलग कारणों से मौतें हुई है

महुआ शराब को पारंपरिक रूप से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बनाया और पिया जाता है, लेकिन अब यह धीमे जहर की तरह लोगों की जान ले रही है। बिना किसी मानक के बनाई जाने वाली इस शराब में खतरनाक केमिकल मिलाए जा रहे हैं, जिससे यह लिवर डैमेज, किडनी फेलियर, हार्ट अटैक और मौत का कारण बन रही है। लोफंदी गांव में 9 लोगों की मौत इसी जहरीली शराब के कारण हुई। महुआ शराब में मिलावट के कारण यह नशे के बजाय शरीर के लिए जहर बन चुकी है…

महुआ शराब की सबसे बड़ी वजह इसकी सस्ती कीमत है। सरकारी देसी शराब महंगी होती है, लेकिन महुआ शराब सस्ते दामों पर आसानी से उपलब्ध होती है, इसलिए लोग इसे ज्यादा खरीदते हैं। गांवों में शराब बनाने और बेचने का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है, क्योंकि इसमें ज्यादा मुनाफा होता है। दूसरी बड़ी वजह प्रशासन और शराब माफियाओं की मिलीभगत है। आबकारी विभाग और पुलिस केवल दिखावे के लिए कार्रवाई करते हैं, लेकिन अवैध शराब का धंधा खुलेआम चलता रहता है। जब तक इस पर सख्ती से रोक नहीं लगाई जाती, तब तक यह लोगों की जिंदगी से खेलता रहेगा….

लोगों का कहना है कि अब महुआ शराब में नशे को बढ़ाने के लिए खतरनाक केमिकल और दवाइयां मिलाई जा रही हैं। तस्कर इसमें स्लीपिंग पिल्स, यूरिया, नौसादर और अन्य जहरीले पदार्थ मिलाते हैं, जिससे इसका असर तेज हो जाए, लेकिन यही शराब धीमे जहर में बदल गई है। गांव वालों का कहना है कि पहले यह पारंपरिक रूप से बनाई जाती थी, लेकिन अब इसमें मिलावट होने लगी है, जिससे मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। लोगों ने सरकार से महुआ शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।यह पहली बार नहीं है जब जहरीली महुआ शराब ने लोगों की जान ली है। प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है, और शराब माफिया खुलेआम अपना कारोबार चला रहे हैं

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