छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों की हड़ताल , सरकार से शासकीयकरण की मांग
सरकार के आश्वासन और समिति की रिपोर्ट के बावजूद निर्णय नहीं हुआ, जिससे सचिवों ने आंदोलन जारी रखने की रणनीति बनाई।

छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों का आंदोलन जारी है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विधानसभा चुनाव 2023-24 के दौरान दिए गए वादे के मुताबिक, उनके शासकीयकरण की गारंटी को लेकर है। हालांकि, अब तक यह वादा पूरा नहीं होने से सचिवों में आक्रोश बढ़ गया है।
क्या है मामला?
07 जुलाई 2024 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की मौजूदगी में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की आवश्यकता को स्वीकारते हुए शीघ्र निर्णय का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद, 16 जुलाई 2024 को एक समिति गठित की गई, जिसे 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की, लेकिन बजट सत्र में इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
इसके बाद सरकार ने एक नई समिति का गठन किया, लेकिन इसमें कोई समय-सीमा तय नहीं की गई, जिससे सचिवों का असंतोष और बढ़ गया है।
सचिवों की नई रणनीति
सचिव संघ का कहना है कि जब तक उनकी शासकीयकरण की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सचिवों का कहना है कि यह मुद्दा उनके भविष्य से जुड़ा है और वे इसे लेकर किसी भी प्रकार की समझौता नहीं करेंगे।
इस बीच, सचिव संघ ने सरकार से शीघ्र और स्पष्ट निर्णय की मांग की है, ताकि उनका आंदोलन समाप्त किया जा सके और उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।
क्या होगा आगे?
पंचायत सचिवों की हड़ताल राज्य भर में प्रभाव डाल रही है और इसके परिणामस्वरूप पंचायत कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इस मामले को कैसे सुलझाती है और सचिवों की शासकीयकरण की मांग पर क्या कार्रवाई करती है।





