भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते पर विपक्ष का हमला, रूस से तेल और किसानों के हितों पर उठे सवाल

भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। पार्टी का कहना है कि इस डील की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से की गई, जिससे इसकी पारदर्शिता और शर्तों पर संदेह पैदा होता है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह समझौता प्रधानमंत्री के अनुरोध पर किया गया बताया जा रहा है और इसके तहत भारत अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को लगभग खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे भारतीय बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए पूरी तरह खुल सकता है।

पार्टी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस समझौते का सीधा असर देश के उद्योग, व्यापारियों और किसानों पर पड़ेगा। खासतौर पर कृषि क्षेत्र को खोलने की बात सामने आने से किसानों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगी और इसकी जगह अमेरिका व वेनेजुएला से तेल खरीदेगी। पार्टी ने पूछा कि क्या सरकार इस शर्त पर सहमत हो गई है और इससे देश की ऊर्जा नीति पर क्या असर पड़ेगा।

इसके साथ ही कांग्रेस ने कहा कि अगर अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदा जाएगा, तो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का क्या होगा। पार्टी ने मांग की कि सरकार ट्रेड डील की पूरी जानकारी संसद और जनता के सामने रखे।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि इस समझौते से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने अमेरिकी आयात पर टैरिफ कम कर दिए हैं, जबकि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका ने शुल्क बढ़ा दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक, कृषि और कोयले जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खरीदारी करनी पड़ सकती है, जिससे देश की आर्थिक स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस व्यापार समझौते की सभी शर्तों को सार्वजनिक करे और देश को भरोसे में लेकर ही आगे कोई फैसला ले।

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