झारखंड से जुड़ा अफीम तस्करी का नेटवर्क उजागर, सरहदी गांवों में कराई जा रही थी अवैध खेती

झारखंड में अवैध अफीम खेती पर बढ़ती कार्रवाई के बाद तस्करों ने अब छत्तीसगढ़ के सरहदी इलाकों को नया ठिकाना बना लिया है। बलरामपुर जिले के कुसमी और कोरंधा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। पुलिस ने अब तक लगभग 6 करोड़ 75 लाख रुपए की अफीम की फसल बरामद की है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
जांच के दौरान पता चला कि अफीम की खेती को मसाले और औषधीय फसल बताकर कराई जा रही थी। इस मामले में जशपुर के एक भाजपा नेता और पूर्व सरपंच जिरहुल समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक अवैध खेती के पीछे झारखंड के तस्करों का नेटवर्क सक्रिय है, जिनकी तलाश की जा रही है।
त्रिपुरी गांव में करीब 3.67 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती मिली। यहां से 1 किलो 800 ग्राम अफीम लेटैक्स भी बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि खेत की आधी फसल पहले ही तस्कर निकालकर ले जा चुके थे।
कोरंधा क्षेत्र के खजुरी पंचायत के तुर्रीपानी गांव में भी करीब 2 करोड़ रुपए की अफीम की फसल बरामद की गई है। यहां से किसान सहादुर नगेशिया और दुईला नगेशिया को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि झारखंड के जतरा निवासी भूपेंद्र उरांव ने उन्हें मसाले और औषधीय फसल की खेती बताकर अफीम बोने के लिए तैयार किया था। किसानों को यह भी पता नहीं था कि वे अफीम की खेती कर रहे हैं और उन्हें अभी तक कोई भुगतान भी नहीं मिला था।
स्थानीय लोगों के अनुसार खेतों में काम कराने के लिए गांव की महिलाओं और नाबालिग लड़कियों से प्रतिदिन 300 रुपए मजदूरी देकर निंदाई-गुड़ाई कराई गई थी। शुरुआत में ग्रामीणों को फसल की पहचान नहीं हुई, लेकिन बाद में शक होने पर इसकी सूचना सरपंच के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाई गई।
जानकारी के मुताबिक झारखंड के लातेहार और गुमला जैसे जिलों में अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई बढ़ने के बाद तस्करों ने छत्तीसगढ़ के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों को नया ठिकाना बना लिया है। इन इलाकों में निगरानी कम होने का फायदा उठाकर अवैध खेती कराई जा रही थी।
प्रशासन ने अब सरहदी गांवों में जांच तेज कर दी है। पटवारी, कोटवार और पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से आसपास के क्षेत्रों में भी अफीम की संभावित खेती की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्ष ने भी विभिन्न क्षेत्रों में अफीम की खेती की जानकारी जुटाने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है। वहीं कुछ अन्य गांवों में भी अफीम की खेती की चर्चा सामने आई है, जिसकी फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।





