एक बार फिर नोटों की नई खेप जारी, 10 और 500 रुपये के आंएगे नए नोट

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर नोटों की नई खेप जारी करने की घोषणा की है। 4 अप्रैल को केंद्रीय बैंक ने बताया कि महात्मा गांधी सीरीज के तहत 10 और 500 रुपये के बैंक नोट जल्द ही जारी किए जाएंगे। इन नोटों पर नए गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे, जो दिसंबर साल 2024 में शक्तिकांत दास की जगह RBI के गवर्नर बने हैं। हालांकि, इन नोटों के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं होगा और ये मौजूदा नोटों की तरह ही रहेंगे।
RBI ने साफ किया कि नए नोटों के आने के बाद भी पहले से चल रहे 10 और 500 रुपये के सभी नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे। यह कदम नकदी की आपूर्ति को बनाए रखने और बैंकिंग सिस्टम में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बता दें कि पिछले महीने RBI ने 100 और 200 रुपये के नोट भी गवर्नर मल्होत्रा के हस्ताक्षर के साथ जारी करने की घोषणा की थी। नए गवर्नर के कार्यभार संभालने के बाद उनके हस्ताक्षर वाले नोट जारी करना एक सामान्य प्रक्रिया है।
केंद्रीय बैंक के बयान के मुताबिक 10 और 500 रुपये के नए नोट महात्मा गांधी सीरीज के मौजूदा डिजाइन को ही फॉलो करेंगे। इनमें कोई नया रंग, थीम या सुरक्षा फीचर नहीं जोड़ा जाएगा। यह फैसला नोटों की पहचान और स्वीकार्यता को बनाए रखने के लिए लिया गया है। संजय मल्होत्रा के गवर्नर बनने के बाद यह उनकी पहली बड़ी नोट जारी करने की घोषणा है।
नोटों की घोषणा के साथ ही RBI ने विदेशी व्यापार को आसान बनाने के लिए भी कदम उठाया है। बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत निर्यात और आयात के लिए नए मसौदा विनियम और निर्देश जारी किए हैं। इसका मकसद व्यापार प्रक्रिया को सरल करना और सभी नियमों को एक दस्तावेज में समेटना है। साथ ही, अधिकृत डीलरों के लिए लेनदेन की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करने पर भी जोर दिया गया है। यह कदम व्यापारियों और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेगा।
बता दें कि केंद्र सरकार ने 8 दिसंबर साल 2016 की मध्यरात्रि को देश में 500 और 1000 रुपये के नोट पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे नोटबंदी का नाम दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक देश को किए संबोधन में ये ऐलान किया गया था। इस घोषणा में 8 नवंबर की रात से देश में 500 और 1000 रुपये के नोटों को खत्म करने का ऐलान किया गया। जिसका उद्देश्य केवल काले धन पर नियंत्रण ही नहीं बल्कि जाली नोटों से छुटकारा पाना भी था। इसके साथ ही ग्राहकों को 23 मई से लेकर 30 सितंबर के बीच किसी भी बैंक में जाकर नोट बदलने की सुविधा दी गई।
वहीं 10 दिसंबर 2016 को 500 और 2000 हजार का नया नोट जारी किया गया। यह पूरी तरह से नए डिजाइन के साथ बैंकनोट्स की महात्मा गांधी की नई श्रृंखला का हिस्सा रहा। यह नोट न केवल एक नए आकार में था, बल्कि इसका मतलब देश के सभी एटीएम को फिर से तैयार किया जाना था , वही इसके उच्च मूल्यवर्ग को विमुद्रीकरण के मूल उद्देश्य के विपरीत देखा गया था।
केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर वोपक्षी दलों ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। इस दौरान नोटबंदी को लेकर 28 नवंबर साल 2016 को भारत बंद का आह्वान भी किया गया था। इस मुद्दे को लेकर राजनितिक गलियारों में लगातार लंबे समय तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला। इस दौरान बड़ी मात्रा में काला धन और हवाला का पैसा भी बाहर आया था।
बता दें कि भारत में स्वंत्रता के बाद सन 1946 में भी इसी तरह का फिसला लिया गया था, जिसमें 1000 और 10 हजार रुपये के नोटों को बंद किया गया था। साथ ही सन 1956 में 1000, 5000 और 10 हजार रुपये का नया नोट जारी किया गया था। वही 16 जनवरी सन 1978 को जनता पार्टी की गठबंधन सरकार ने 1000, 5000 और 10 हजार रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण किया था, ताकि जालसाजी और काले धन पर अंकुश लगा सके।
भारत में 38 साल बाद साल 2016 को सबसे बड़ा नोट जारी किया गया था, जो 2000 रुपये का था। वही भारतीय रिजर्व बैंक ने लोगों को चौकते हुए 19 मई को फिरसे 2000 रुपये का नोट वापस लेने का फैसला लिया। वही RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फिर से 10 और 500 रुपये के नए नोट की घोषणा कर दी है। हालांकि इस नए नोट से लोगों के जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि नए हस्ताक्षर के साथ इन नोटों की छपाई होगी। भारतीय रिजर्व बैंक और नए नोटों से जुड़ी ये जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताएं और वीडियो को लाइक और शेयर करें, ताकि इस खबर का अपडेट हम आप तक जल्दी से जल्दी पंहुचा सकें।





