बिलासपुर एयरपोर्ट पर धीमी प्रगति से नाराज हाईकोर्ट, नाइट लैंडिंग के बावजूद उड़ानें शुरू नहीं

बिलासपुर स्थित एयरपोर्ट के विकास और सीमित हवाई सेवाओं को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि नाइट लैंडिंग की अनुमति मिलने के बावजूद अब तक रात में उड़ानें शुरू नहीं होना गंभीर लापरवाही दर्शाता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करें और बताएं कि उपलब्ध सुविधाओं का लाभ जनता को क्यों नहीं मिल रहा है। साथ ही केवल एक एयरलाइन पर निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं और अन्य कंपनियों को जोड़ने के प्रयासों की जानकारी मांगी गई है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नाइट लैंडिंग की अनुमति पहले ही मिल चुकी है, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर अब तक सेवाएं शुरू नहीं की गईं। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए जवाब तलब किया।
इधर, एयरपोर्ट विस्तार के लिए सेना ने करीब 290 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को सौंप दी है। इसके बाद अब एयरपोर्ट के पास कुल जमीन बढ़कर 646 एकड़ से अधिक हो गई है, जिससे इसके विस्तार का रास्ता साफ हो गया है।
अतिरिक्त जमीन मिलने के बाद रनवे विस्तार और अन्य सुविधाओं को विकसित करने की योजना पर तेजी आने की उम्मीद है। बड़े विमानों की आवाजाही के लिए रनवे को बढ़ाने और एयरपोर्ट को उच्च श्रेणी में अपग्रेड करने की तैयारी की जा रही है।
यह मामला पिछले कई वर्षों से कोर्ट में विचाराधीन है। लगातार निगरानी और सख्ती के चलते पहले भी यहां से हवाई सेवाएं शुरू की गई थीं, लेकिन अब भी सुविधाओं के विस्तार और उड़ानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।
कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि अगली सुनवाई में प्रगति संतोषजनक नहीं होने पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।





